लद्दाख के लोगों को राज्य का दर्जा चाहिए और वो चाहते हैं कि इस इलाके को भारत के संविधान की छठी अनुसूची में शामिल किया जाए, लेकिन सरकार जिस तरह से बात टाल रही है, उसी की वजह से ये सब हो रहा है। सरकार सुरक्षा का हवाला देकर लद्दाख पर अपनी पकड़ बनाए रखना चाहती है। ये तो बेतुकी बात है। आखिर, आर्टिकल 370 के हटने तक लद्दाख जम्मू-कश्मीर राज्य का ही हिस्सा था। ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं है जिससे ये साबित हो कि जम्मू-कश्मीर राज्य ने देश की सीमाओं की सुरक्षा के लिए केंद्र सरकार के काम में अड़ंगा डाला हो, ताक़ि लद्दाख को सीधे केंद्र सरकार के नियंत्रण में रखने की ज़रूरत पड़ जाए।
अब सरकार सारा दोष सोनम वांगचुक पर डाल रही है कि उन्होंने हिंसा भड़काई। उन पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही थी और अब उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है ।उनके एनजीओ पर पाबंदियां लगा दी गई है जिसके कारण उनको मिलने वाली सहायता के स्रोत सूख जाएंगे और वो लोगों की जो मदद करते हैं, वो भी रुक जाएगी।
लेकिन ज्यादातर लोगों को तो यही लग रहा है कि इस इलाके को अलग केंद्र शासित प्रदेश सिर्फ इसलिए बनाया गया है ताकि उद्योगपतियों को जमीन देने में आसानी हो। पहले से ही, एक बहुत बड़ा सोलर पार्क बन रहा है; इंडस्ट्री के लिए ज़मीन देने से चरवाहों को अपने चरागाहों की ज़मीन से हाथ धोना पड़ेगा। ज्यादातर लोगों का गुज़ारा तो पशुपालन से ही चलता है।
इसलिए, हम लद्दाख के लोगों की मांग का पूरा समर्थन करते हैं और सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी की निंदा करते हैं । हम हिंसाचार के लिए सरकार को ज़िम्मेदार मानते हैं। सरकार की लापरवाही, बेरुखी या ज़िद की वजह से ही ये सब हो रहा है। सरकार को ये समझना चाहिए कि उसकी ज़िद के नतीजे बुरे हो सकते हैं। सरकार के लिए यही अच्छा है कि वो लोगों की असली मांगें माने और हम युवाओं से भी अपील करते हैं कि वो शांति के मार्ग पर वापस आए । सिटीजन फॉर डेमोक्रेसी किसी भी प्रकार के हिंसक आंदोलन को सही नहीं मानता और शांतिपूर्ण तथा अहिंसात्मक प्रतिरोध को लोकतांत्रिक मानता है।
शशि शेखर प्रसाद सिंह
महासचिव, सिटीजन फॉर डेमोक्रेसी







