बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों के बाद राष्ट्रीय जनता दल (RJD) में आंतरिक कलह की आशंकाएं तेज हो गई हैं। हाल ही में RJD के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पर निशाना साधते हुए सोशल मीडिया पर एक लंबा पोस्ट लिखा, जिसमें उन्होंने तेजस्वी को चुनावी हार के बाद भी मैदान में उतरने की नसीहत दी। इस बयान के ठीक एक दिन बाद भाजपा ने इसे हवा देते हुए बड़ा दावा किया है, जिससे तेजस्वी की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
शिवानंद तिवारी का बयान: ‘मैदान छोड़ दिया
10 दिसंबर को शिवानंद तिवारी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर तेजस्वी को संबोधित करते हुए लिखा:
“तेजस्वी, तुम लालू प्रसाद के पुत्र हो। उनके वारिस हो। बल्कि राष्ट्रीय जनता दल का कमान अब तुम्हारे ही हाथ में है। पिछले चुनाव में घोषणा की गई थी कि यदि महागठबंधन को बहुमत मिला तो तुम ही मुख्यमंत्री बनोगे। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। जय और पराजय तो राजनीति का नियम है। तुमने तो मैदान छोड़ दिया। विदेश चले गए। संजय और जगता भाई ने तुम्हारी आंखों पर पट्टी बांध दी थी। खूब हरियाली दिखाई। एवज में दोनों ने भरपूर हासिल भी कर लिया। तुमको भी वही अच्छा लगता था।”
तिवारी ने आगे सलाह दी कि तेजस्वी को तुरंत विदेश से लौटना चाहिए, बिहार का दौरा नेता के रूप में नहीं बल्कि कार्यकर्ता के रूप में करना चाहिए, और हार-जीत को सही ढंग से संभालना चाहिए। उन्होंने RJD में विरोध की राजनीति के मैदान को खाली बताते हुए चिंता जताई कि नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली NDA सरकार के खिलाफ मजबूत विपक्ष की कमी से बिहार पर RSS का झंडा फहराने का खतरा है।
यह बयान चुनावी हार के बाद तेजस्वी की अनुपस्थिति (वह विधानसभा सत्र के दौरान विदेश यात्रा पर थे) और पार्टी की 25 सीटों तक सिमटने के संदर्भ में आया है। तिवारी खुद RJD से निष्कासित हो चुके हैं, लेकिन उनकी नसीहत ने पार्टी के आंतरिक मतभेदों को उजागर कर दिया।
BJP का दावा: ‘RJD में विद्रोह बाहर दिखेगा, परिवार से पार्टी तक बगावत’
तिवारी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए बिहार के शिक्षा मंत्री मंगल पांडेय (भाजपा कोटे से) ने 11 दिसंबर 2025 को पत्रकारों से कहा:
“RJD के अंदर जो लड़ाई चल रही है, वह बहुत जल्द बाहर दिखाई देगी। नेतृत्व के खिलाफ विद्रोह दिखेगा। परिवार में विद्रोह तो दिख चुका है, अब पार्टी में विद्रोह आ रहा है। तेजस्वी मैदान छोड़कर भाग गए हैं।”
पांडेय ने RJD पर हमला बोलते हुए कहा कि चुनावी हार के बाद पार्टी में असंतोष बढ़ रहा है, और यह बगावत जल्द ही खुलकर सामने आएगी। भाजपा इसे NDA सरकार के लिए फायदेमंद मान रही है, क्योंकि इससे महागठबंधन की एकजुटता पर सवाल उठ रहे हैं।
“तेजस्वी, तुम लालू प्रसाद के पुत्र हो। उनके वारिस हो। बल्कि राष्ट्रीय जनता दल का कमान अब तुम्हारे ही हाथ में है। पिछले चुनाव में घोषणा की गई थी कि यदि महागठबंधन को बहुमत मिला तो तुम ही मुख्यमंत्री बनोगे। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। जय और पराजय तो राजनीति का नियम है। तुमने तो मैदान छोड़ दिया। विदेश चले गए। संजय और जगता भाई ने तुम्हारी आंखों पर पट्टी बांध दी थी। खूब हरियाली दिखाई। एवज में दोनों ने भरपूर हासिल भी कर लिया। तुमको भी वही अच्छा लगता था।”
तिवारी ने आगे सलाह दी कि तेजस्वी को तुरंत विदेश से लौटना चाहिए, बिहार का दौरा नेता के रूप में नहीं बल्कि कार्यकर्ता के रूप में करना चाहिए, और हार-जीत को सही ढंग से संभालना चाहिए। उन्होंने RJD में विरोध की राजनीति के मैदान को खाली बताते हुए चिंता जताई कि नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली NDA सरकार के खिलाफ मजबूत विपक्ष की कमी से बिहार पर RSS का झंडा फहराने का खतरा है।
यह बयान चुनावी हार के बाद तेजस्वी की अनुपस्थिति (वह विधानसभा सत्र के दौरान विदेश यात्रा पर थे) और पार्टी की 25 सीटों तक सिमटने के संदर्भ में आया है। तिवारी खुद RJD से निष्कासित हो चुके हैं, लेकिन उनकी नसीहत ने पार्टी के आंतरिक मतभेदों को उजागर कर दिया।
BJP का दावा: ‘RJD में विद्रोह बाहर दिखेगा, परिवार से पार्टी तक बगावत’
तिवारी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए बिहार के शिक्षा मंत्री मंगल पांडेय (भाजपा कोटे से) ने 11 दिसंबर 2025 को पत्रकारों से कहा:
“RJD के अंदर जो लड़ाई चल रही है, वह बहुत जल्द बाहर दिखाई देगी। नेतृत्व के खिलाफ विद्रोह दिखेगा। परिवार में विद्रोह तो दिख चुका है, अब पार्टी में विद्रोह आ रहा है। तेजस्वी मैदान छोड़कर भाग गए हैं।”
पांडेय ने RJD पर हमला बोलते हुए कहा कि चुनावी हार के बाद पार्टी में असंतोष बढ़ रहा है, और यह बगावत जल्द ही खुलकर सामने आएगी। भाजपा इसे NDA सरकार के लिए फायदेमंद मान रही है, क्योंकि इससे महागठबंधन की एकजुटता पर सवाल उठ रहे हैं।
तेजस्वी यादव की बढ़ सकती है टेंशन
RJD में आंतरिक कलह: 2025 चुनाव में RJD को महज 25 सीटें मिलीं, जबकि महागठबंधन बहुमत से चूका। तिवारी जैसे वरिष्ठ नेताओं के बयान से पार्टी में लालू परिवार के नेतृत्व पर सवाल उठ रहे हैं। तेजस्वी को युवा चेहरा माना जाता है, लेकिन उनकी विदेश यात्रा और सदन से अनुपस्थिति को भाजपा ‘भागने’ का आरोप लगा रही है।
भाजपा की रणनीति: NDA खेमे में विधायकों के पाला बदलने की अटकलें पहले से हैं (जैसे AIMIM के 5 विधायकों पर नजर), और अब RJD के आंतरिक झगड़ों को हथियार बनाकर विपक्ष को कमजोर करने की कोशिश हो रही है।
तेजस्वी की चुनौती: उन्हें न केवल पार्टी को एकजुट रखना है, बल्कि विपक्ष की भूमिका निभानी है। तिवारी की नसीहत और भाजपा के दावे से उनकी छवि पर असर पड़ सकता है, खासकर जब बिहार में 2029 लोकसभा चुनाव की तैयारी शुरू हो चुकी है।
भाजपा की रणनीति: NDA खेमे में विधायकों के पाला बदलने की अटकलें पहले से हैं (जैसे AIMIM के 5 विधायकों पर नजर), और अब RJD के आंतरिक झगड़ों को हथियार बनाकर विपक्ष को कमजोर करने की कोशिश हो रही है।
तेजस्वी की चुनौती: उन्हें न केवल पार्टी को एकजुट रखना है, बल्कि विपक्ष की भूमिका निभानी है। तिवारी की नसीहत और भाजपा के दावे से उनकी छवि पर असर पड़ सकता है, खासकर जब बिहार में 2029 लोकसभा चुनाव की तैयारी शुरू हो चुकी है।






