कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने आज ‘वीर सावरकर इंटरनेशनल इम्पैक्ट अवॉर्ड 2025’ के ऐलान पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें इस पुरस्कार के बारे में कोई पूर्व जानकारी नहीं थी और वे इसे स्वीकार नहीं करेंगे। थरूर ने कहा कि आयोजकों ने बिना उनकी सहमति के उनका नाम घोषित करना गैर-जिम्मेदाराना कदम है।
क्या है पूरा मामला?
पुरस्कार का विवरण: यह अवॉर्ड आरएसएस से जुड़े एनजीओ हाईरेंज रूरल डेवलपमेंट सोसाइटी (एचआरडीएस इंडिया) द्वारा दिया जा रहा है। यह विनायक दामोदर सावरकर की स्मृति में स्थापित पहला संस्करण है, जो राष्ट्रवाद, स्वावलंबन, नैतिक साहस और सामाजिक परिवर्तन जैसे आदर्शों पर आधारित है। पुरस्कार में 1 लाख रुपये, प्रमाण-पत्र और स्मृति चिन्ह शामिल हैं।
घोषणा: थरूर सहित छह व्यक्तियों को यह अवॉर्ड मिलने की घोषणा की गई थी। थरूर को उनके राष्ट्रीय और वैश्विक प्रभाव के लिए चुना गया। समारोह आज दिल्ली के एनडीएमसी कन्वेंशन हॉल में हो रहा है, जहां रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पुरस्कार वितरित करेंगे।
घोषणा: थरूर सहित छह व्यक्तियों को यह अवॉर्ड मिलने की घोषणा की गई थी। थरूर को उनके राष्ट्रीय और वैश्विक प्रभाव के लिए चुना गया। समारोह आज दिल्ली के एनडीएमसी कन्वेंशन हॉल में हो रहा है, जहां रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पुरस्कार वितरित करेंगे।
थरूर की जानकारी कब हुई?: थरूर को यह खबर 9 दिसंबर को केरल में स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान मीडिया रिपोर्ट्स से पता चली। वहां उन्होंने पत्रकारों से कहा कि वे न तो जागरूक थे और न ही सहमत। फिर भी, आज दिल्ली में मीडिया के सवालों पर उन्होंने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर स्पष्ट बयान जारी किया।
थरूर का पूरा बयान
“मुझे मीडिया रिपोर्ट्स से पता चला है कि मुझे ‘वीर सावरकर अवॉर्ड’ का प्राप्तकर्ता नामित किया गया है, जो आज दिल्ली में प्रदान किया जाना है। मैंने कल केरल में स्थानीय स्वशासन चुनावों के लिए मतदान करने गया था, जहां यह घोषणा मुझे पता चली। तिरुवनंतपुरम में मीडिया के सवालों पर मैंने स्पष्ट किया था कि मैं न तो इससे अवगत था और न ही इसे स्वीकार किया था, और आयोजकों का मेरा नाम बिना सहमति के घोषित करना गैर-जिम्मेदाराना था।
फिर भी, आज दिल्ली में कुछ मीडिया आउटलेट्स वही सवाल पूछ रहे हैं। इसलिए, मैं इस मामले को स्पष्ट करने के लिए यह बयान जारी कर रहा हूं। पुरस्कार की प्रकृति, इसे प्रदान करने वाले संगठन या अन्य संदर्भों के बारे में स्पष्टीकरण के अभाव में, आज के कार्यक्रम में भाग लेने या पुरस्कार स्वीकार करने का सवाल ही नहीं उठता।”
फिर भी, आज दिल्ली में कुछ मीडिया आउटलेट्स वही सवाल पूछ रहे हैं। इसलिए, मैं इस मामले को स्पष्ट करने के लिए यह बयान जारी कर रहा हूं। पुरस्कार की प्रकृति, इसे प्रदान करने वाले संगठन या अन्य संदर्भों के बारे में स्पष्टीकरण के अभाव में, आज के कार्यक्रम में भाग लेने या पुरस्कार स्वीकार करने का सवाल ही नहीं उठता।”
अन्य प्रतिक्रियाएं
कांग्रेस नेता के. मुरलीधरन ने कहा कि सावरकर ने ब्रिटिशों के आगे सिर झुकाया था, इसलिए किसी भी कांग्रेसी को यह अवॉर्ड स्वीकार नहीं करना चाहिए। उन्होंने थरूर सहित सभी को इसे ठुकराने की सलाह दी।

