जाट नेताओं से मिले शाह, बीजेपी सांसद ने जयंत को दिया साथ आने का प्रस्ताव, रालोद नेता ने ठुकराया 

द न्यूज 15 
नई दिल्ली । जाटों की नाराजगी बीजेपी को साल रही है। हालांकि, तीन विवादास्पद कृषि कानूनों को निरस्त कर मोदी सरकार ने किसानों व जाटों के गुस्से को दूर करने की कोशिश की लेकिन हालात ठीक होते नहीं दिख रहे। बीजेपी सांसद परवेश वर्मा ने रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी को साथ आने का न्योता दिया। लेकिन उन्होंने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया। जयंत ने केंद्र व राज्य की सत्ताधरी पार्टी को विवादास्पद कृषि कानूनों के खिलाफ साल भर से अधिक समय तक चले आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों की याद दिलाई।
सूत्रों के मुताबिक शाह ने जाट नेताओं से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कानून व व्यवस्था में सुधार से लेकर किसानों की समस्याओं के मद्देनजर केंद्र व राज्य की भाजपा सरकारों की ओर से उठाए गए कदमों का उल्लेख किया। शाह ने यह भी कहा कि भाजपा ने तीन-तीन जाट नेताओं को राज्यपाल बनाया और सबसे अधिक विधायक और सांसद दिए।
एक नेता के मुताबिक शाह ने जाट नेताओं से विधानसभा चुनाव में भाजपा को जीताने की अपील करते हुए कहा कि उन्होंने उत्तर प्रदेश से ही राष्ट्रीय राजनीति में कदम रखा। जाट समुदाय ने हमेशा उनकी अपील का सम्मान किया। चाहे 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव हों या फिर 2017 का विधानसभा चुनाव। बैठक के बाद जाट नेताओं ने कहा कि उनकी ओर से जाट आरक्षण, पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न देने सहित किसानों के अन्य मुद्दे उठाए गए। शाह ने इन मुद्दों को पूरा करने उन्हें आश्वासन दिया।हालांकि, बैठक में शामिल भाजपा के बड़े नेताओं ने इस बात को स्वीकार किया कि जाट आरक्षण का मुद्दा उठा जरूर था लेकिन शाह के आश्वासन की बात पर उन्होंने स्पष्टता से कुछ नहीं कहा। केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान ने कहा गृह मंत्री हमेशा जाट समाज को बुलाते हैं और कभी भी चुनाव हो तो उनसे बात भी करते हैं। जाट आरक्षण के सवाल पर उन्होंने कहा कि बात आई थी। उसमें गृह मंत्री जी ने अपनी बात रखी है। इसको लेकर कुछ मीटिंग की है।
बागपत से भाजपा सांसद सत्यपाल सिंह से एक चैनल ने पूछा कि क्या शाह ने जाट आरक्षण पर कोई आश्वास दिया है, तो उन्होंने कहा कि अगर कहा है तो विश्वास करना चाहिए उनकी बातों पर… वह जो कहते हैं, उसे करते हैं। बैठक दिल्ली से भाजपा के सांसद प्रवेश साहिब सिंह वर्मा के आवास पर हुई और इसे सामाजिक भाईचारा बैठक का नाम दिया गया था।
परवेश वर्मा ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान राष्ट्रीय लोक दल के अध्यक्ष जयंत चौधरी को भाजपा गठबंधन में आने का प्रस्ताव दिया। उन्होंने कहा कि यह बात तय है कि चुनाव बाद भाजपा की सरकार बनेगी। जयंत चौधरी ने एक अलग रास्ता चुना है। जाट समाज के लोग उनसे बात करेंगे, उन्हें समझाएंगे। चुनाव के बाद संभवनाएं हमेशा खुली रहती हैं। हमारा दरवाजा आपके लिए खुला है। चुनाव के बाद देखेंगे कि क्या संभावना बनती है। हम तो चाहते थे कि हमारे घर में आएं पर उन्होंने कोई दूसरा घर चुना है।

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