मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के एकतरफा फैसलों पर सवाल उठाने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट अगले सप्ताह सुनवाई करेगा। वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने मामले को मंगलवार को CJI सूर्यकांत की बेंच के सामने रखा। उन्होंने कहा कि कानून के मुताबिक चुनाव आयोग में फैसले सर्वसम्मति या बहुमत से होने चाहिए। अगर SIR समेत दूसरे फैसले आयोग ने सर्वसम्मति से नहीं लिए, तो यह गंभीर मुद्दा है। इसकी जांच होनी चाहिए. उनकी बातें सुनने के बाद चीफ जस्टिस ने मामले को अगले हफ्ते सुनवाई के लिए लगाने को कहा।
विकास सिंह ने कहा कि मल्टी-मेंबर कमीशन बनाने का मकसद यह था और कानून में भी यही लिखा है कि फैसला सर्वसम्मति से या बहुमत से लिया जाए। अब जिस तरह से चुनाव आयोग ने काम किया है। उसे देखते हुए इस बात पर गंभीर संदेह है कि क्या SIR की पूरी प्रक्रिया के लिए चुनाव आयोग का कोई फैसला हुआ भी था या नहीं। उन्होंने कहा कि अगर आयोग ने सर्वसम्मति से फैसला नहीं लिया है, तो कोर्ट ने भी जो फैसला दिया है, वह इसी आधार पर दिया है कि यह आयोग का फैसला है। इसलिए यह एक गंभीर मामला है।
फैसलों को निरस्त करने की मांग
बता दें कि 23 सितंबर को इंडियन एक्सप्रेस अखबार ने चुनाव आयोग और एसआईआर को लेकर बड़ा खुलासा किया था। रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्तों डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े फैसलों को लेकर 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कीं. इसी को लेकर पूरा विवाद है।
इसके बाद 25 सितंबर को शैलेंद्र मणि त्रिपाठी नाम के वकील ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की। याचिका में ज्ञानेश कुमार समेत दूसरे अधिकारियों पर कार्रवाई करने की मांग की गई है. याचिकाकर्ता ने आपत्तियों वाले सभी फैसलों को भी निरस्त करने की मांग की है।








