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2 अक्टूबर को इंदौर में होगा संयुक्त किसान मोर्चा का मध्य प्रदेश का राज्य सम्मेलन

30 से अधिक किसान संगठनों के नेताओं ने बैठक में तैयारियों पर की चर्चा

एमएसपी गारंटी ,कर्जा मुक्ति कानून, किसान पेंशन केंद्र और राज्य सरकारों की किसान-मजदूर विरोधी नीतियों पर सम्मेलन में होगा मंथन

 

इंदौर। संयुक्त किसान मोर्चा के तत्वावधान में आगामी 2 अक्टूबर को इंदौर के गांधी हॉल में आयोजित होने वाले मध्य प्रदेश राज्य सम्मेलन की तैयारियों को लेकर आज प्रदेश के विभिन्न किसान संगठनों की बैठक संपन्न हुई। बैठक में प्रदेश के विभिन्न जिलों से 30 से अधिक किसान संगठनों के प्रतिनिधियों और किसान नेताओं ने भाग लिया।
बैठक में इंदौर, भोपाल, बैतूल, सिवनी, नर्मदापुरम, रायसेन, छतरपुर, ग्वालियर, रीवा, सतना, नीमच, मंदसौर, रतलाम, अलीराजपुर, जबलपुर, मुरैना, झाबुआ, खरगोन, बड़वानी, सागर, छिंदवाड़ा , बालाघाट, गुना सहित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के किसान नेताओं ने सम्मेलन की तैयारियों और किसानों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की।
बैठक में नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेत्री मेधा पाटकर, किसान संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सुनीलम, किसान सभा के संयुक्त सचिव बादल सरोज, प्रदेश अध्यक्ष अशोक तिवारी, राज्य महासचिव अखिलेश यादव, आदिवासी अधिकार राष्ट्रीय मंच के केंद्रीय कमेटी सदस्य रामनारायण कुररिया, अरुण चौहान , भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव, संकिमो सिवनी के संयोजक डी.डी. वासनिक, भारतीय किसान एवं मजदूर सेना के प्रदेश अध्यक्ष बबलू जाधव, एनएपीएम के कृपाल मंडलोई, किसान संगठन गैरतगंज के अध्यक्ष मुकेश धाकड़, किसान गर्जना के प्रदेश अध्यक्ष अरविंद चौधरी, संकिमो रीवा के संयोजक एड. शिवसिंह, किसान सभा (अजय भवन) के जनक सिंह राठौड़, रूद्रपाल यादव, किसान आदिवासी संगठन के अध्यक्ष फागराम, कपिल खंडेरवार, बर्गी बांध विस्थापित संघ के राजकुमार सिन्हा, अभाकिखेमसं के मनीष श्रीवास्तव, सोनू शर्मा, शहीद राघवेन्द्र सिंह किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह शंखू, किसान क्रांति के अध्यक्ष दिलीप शर्मा, भारतीय किसान श्रमिक जनशक्ति यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष संदीप ठाकुर, किसान संघर्ष समिति की प्रदेश अध्यक्ष एड. आराधना भार्गव, मालवा-निमाड़ क्षेत्र संयोजक रामस्वरूप मंत्री, भागवत परिहार सहित अनेक किसान नेताओं ने बैठक को संबोधित किया।
बैठक में तय किया गया कि
2 अक्टूबर के राज्य सम्मेलन में मध्य प्रदेश के प्रत्येक जिले से किसान संगठनों और किसानों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए जिला स्तर पर बैठकें और यात्राएं की जाएं।
सम्मेलन में प्रदेश के किसानों से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर चर्चा कर आगे के संघर्ष की दिशा और कार्यक्रम तय किए जाएंगे। बैठक में मुख्य रूप से भूमि अधिग्रहण, एमएसपी की कानूनी गारंटी, कर्ज माफी, बड़े बांधों से किसानों एवं ग्रामीण क्षेत्रों को होने वाले नुकसान, मध्य प्रदेश को सूखाग्रस्त घोषित करने, दूध के दाम बढ़ाने, स्मार्ट मीटर पर रोक लगाने, बीमा कंपनियों की लूट बन्द कराने, न्यूक्लियर पावर प्लांट पर रोक लगाने, ई-टोकन सिस्टम स्थगित करने तथा सरकार की किसान-मजदूर नीतियों सहित प्रदेश की स्थानीय किसान समस्याओं पर विचार-विमर्श किया गया। बैठक में किसानों के विभिन्न मुद्दों को लेकर 26 नवंबर से पक्का किसान मोर्चा लगाने की तैयारियों पर भी चर्चा हुई। राज्य सम्मेलन में इस संबंध में विस्तार से विचार कर आगे की रणनीति तय की जाएगी।

बैठक का संचालन डॉ. सुनीलम ने किया।

किसान नेताओं ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों की किसान मजदूर विरोधी नीतियों से प्रदेश में आक्रोश प्राप्त है।
प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में किसानों की समस्याएं अलग-अलग स्वरूप में सामने आ रही हैं, लेकिन भूमि, फसल का उचित मूल्य, जल संसाधन और सरकारी नीतियों से जुड़े अनेक मुद्दे पूरे प्रदेश के किसानों को प्रभावित कर रहे हैं। राज्य सम्मेलन में व्यापक किसान प्रतिनिधित्व के साथ सामूहिक संघर्ष की आगामी दिशा तय करने के ठोस निर्णय लिए जाएंगे। एस के एम के राष्ट्रीय नेता प्रादेशिक सम्मेलन में भागीदारी करेंगे।

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