दलित-पिछड़े वर्ग के मताधिकार कटौती पर जताई आपत्ति
पूसा/समस्तीपुर। बिहार में चुनाव आयोग द्वारा जारी विशेष सघन मतदाता पुनरीक्षण कार्यक्रम के विरोध में इंकलाबी नौजवान सभा (आरवाईए) ने सोमवार को समस्तीपुर के पूसा प्रखंड अंतर्गत बिरौली में आक्रोश मार्च निकाला। आरवाईए ने इस प्रक्रिया को गरीब, दलित और पिछड़े तबके के मताधिकार पर हमला करार दिया।
मार्च की अध्यक्षता आरवाईए जिला सचिव रौशन कुमार ने की, जबकि संचालन राजीव कुमार ने किया। सभा को संबोधित करते हुए रौशन कुमार ने कहा कि “बिहार का बड़ा तबका बेरोजगार, छात्र और गरीब मजदूरों का है, जो पहले से ही जीवन की बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहा है। ऐसे में चुनाव आयोग द्वारा 11 दस्तावेजों की मांग करके मतदाता सूची से नाम हटाना, लोकतंत्र और संविधान पर सीधा हमला है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग का यह कदम गरीबों, खासकर ग्रामीण और वंचित वर्गों को मतदान प्रक्रिया से बाहर करने की साजिश है। उन्होंने चुनाव आयोग को “भाजपा का एजेंट” बताते हुए कहा कि “यह गहन पुनरीक्षण नहीं, बल्कि मताधिकारों की कटौती की संघी साजिश है।”
सभा में वक्ताओं ने कहा कि आधार, वोटर ID, शैक्षणिक प्रमाण पत्र, पेंशन आदेश और भूमि दस्तावेज जैसे प्रमाण मांगे जा रहे हैं, जो बीएलओ के पास भी नहीं हैं। इससे प्रवासी मजदूर, छात्र और गरीब वर्ग चुनावी प्रक्रिया से बाहर हो जाएंगे।
आरवाईए नेता राजीव कुमार ने घोषणा की कि “9 जुलाई को इंडिया गठबंधन के आह्वान पर राज्यभर में सड़क पर उतरकर इस जनविरोधी पुनरीक्षण के खिलाफ आंदोलन किया जाएगा। जब तक यह तुगलकी फरमान वापस नहीं होता, तब तक महागठबंधन के नेतृत्व में संघर्ष जारी रहेगा।”
इस अवसर पर विशाल कुमार, सूरज कुमार, गुड्डू कुमार, विक्की कुमार, निशांत कुमार, सावन कुमार, गोलू कुमार, अमन कुमार समेत दर्जनों युवाओं ने भाग लिया।








