अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 15 अक्टूबर 2025 को दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें आश्वासन दिया है कि भारत अब रूस से तेल नहीं खरीदेगा। ट्रंप ने कहा, “मोदी ने मुझे आश्वस्त किया है कि रूस से तेल की खरीद बंद हो जाएगी। यह एक बड़ा कदम है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह प्रक्रिया तुरंत पूरी नहीं हो सकती, लेकिन जल्द ही समाप्त हो जाएगी। यह दावा यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में आया, जहां ट्रंप ने भारत की रूस से तेल खरीद को रूस की जंग जारी रखने का कारण बताया। हालांकि, भारत ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि उसकी नीतियां राष्ट्रीय हितों पर आधारित हैं।
रूस का सख्त मैसेज
ट्रंप के इस ‘खोखले दावे’ पर रूस ने घंटों बाद ही कड़ी प्रतिक्रिया दी। भारत में रूस के राजदूत डेनिस अलीपोव ने कहा कि रूसी तेल भारत की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने ट्रंप को ललकारते हुए वैश्विक उत्तर (ग्लोबल नॉर्थ) की टैरिफ और प्रतिबंधों की नीति की आलोचना की, इसे बहुध्रुवीय विश्व को स्वीकार न करने का प्रमाण बताते हुए। अलीपोव ने कहा, “ग्लोबल नॉर्थ टैरिफ और विभिन्न प्रकार के प्रतिबंध लगाना जारी रखे हुए है। यह दिखाता है कि वे बहुध्रुवीय विश्व को स्वीकार करने के लिए अनिच्छुक हैं। इससे वैश्विक शासन प्रणाली में सुधारों में देरी होगी, जो बहुत आवश्यक हैं।”
भारत के संदर्भ में रूस ने बड़ी बात कही: “भारत की कुल कच्चे तेल आयात का एक-तिहाई हिस्सा रूस से आता है। हम भारत के लिए सस्ता विकल्प रहे हैं। रूस और भारत के बीच रणनीतिक साझेदारी को विश्व में स्थिरता लाने वाली शक्ति के रूप में देखा जाता है। यह रिश्ता विश्वास पर आधारित है। हम भारत के प्रमुख व्यापारिक साझेदार हैं और ऊर्जा क्षेत्र में भारत के लिए सबसे विश्वसनीय साझेदार हैं।” यह बयान ट्रंप के दावे को सीधे चुनौती देता है और भारत-रूस संबंधों की मजबूती पर जोर देता है।
भारत की स्थिति
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने ट्रंप के दावे पर कहा, “भारत तेल और गैस का प्रमुख आयातक है। अस्थिर ऊर्जा परिदृश्य में भारतीय उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा हमारी लगातार प्राथमिकता रही है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत ऊर्जा स्रोतों को विविधीकृत करने और बाजार की स्थितियों के अनुसार निर्णय लेने पर फोकस कर रहा है, जिसमें अमेरिका के साथ भी संबंध मजबूत करना शामिल है।
यह घटना भारत-अमेरिका व्यापार तनाव को दर्शाती है, जहां ट्रंप ने पहले ही भारत पर 50% टैरिफ लगाए हैं, मुख्य रूप से रूसी तेल खरीद के कारण। रूस का यह मैसेज न केवल ट्रंप के दावों को खोखला साबित करता है, बल्कि भारत की संप्रभुता और ऊर्जा सुरक्षा को समर्थन भी देता है।






