भारतीय सरकारी तेल रिफाइनरी कंपनियों, जैसे इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, हिंदुस्तान पेट्रोलियम, भारत पेट्रोलियम और मैंगलोर रिफाइनरी ने रूस से कच्चे तेल की खरीद अस्थायी रूप से रोक दी है। इसका कारण अमेरिकी टैरिफ दबाव और रूसी तेल पर छूट में कमी बताया गया। हालांकि, भारत सरकार ने इन दावों का खंडन किया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि उन्हें इस तरह की कोई विशिष्ट जानकारी नहीं है और भारत की ऊर्जा नीति पारदर्शी है, जो राष्ट्रीय हितों और वैश्विक बाजार पर आधारित है।
भारत सरकार ने स्पष्ट किया कि ऊर्जा सुरक्षा देश की प्राथमिकता है और वह विविध स्रोतों से तेल आयात जारी रखेगा। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि भारत किसी भी स्थिति से निपटने में सक्षम है, क्योंकि उसने 40 देशों से तेल खरीदने की व्यवस्था की है। रूस भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता है, जो कुल आयात का लगभग 35-40% हिस्सा देता है। निजी कंपनियां जैसे रिलायंस और नायरा एनर्जी अभी भी रूस से तेल खरीद रही हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर सकता है, लेकिन उन्होंने इसकी सत्यता पर अनिश्चितता जताई। भारत ने इस पर दोटूक जवाब दिया कि तेल खरीद के फैसले रणनीतिक हितों और बाजार कीमतों पर आधारित हैं, न कि बाहरी दबाव पर।
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