अमेरिका से बढ़ सकता है रूस और चीन का टकराव
चरण सिंह
इजरायल और ईरान युद्ध के बीच जिस तरह से अमेरिका, रूस और चीन सक्रिय हो रहा है, उससे लगने लगा है कि अब तीसरा विश्व युद्ध होने जा रहा है। विश्व युद्ध के आसार इसलिए पैदा हो गए हैं क्योंकि अमेरिका इजरायल का समर्थन करते हुए बोल रहा है कि किसी भी हालत में ईरान को परमाणु नहीं बनाने दिया जाएगा और चीन और रूस ईरान के पास परमाणु होने के समर्थक हैं। चीन ने ईरान को धमकी दे दी है कि उसके ऊपर का आसमान पर उनका कब्ज़ा है जब वे चाहेंगे ख़ामेनेई को मार डालेंगे। उधर खबर यह भी आ रही है कि ख़ामेनेई रूस में है।
देखने की बात यह है कि इजराइल के ईरान पर हमले के बाद रूस की ओर से आई प्रतिक्रिया ने दुनिया भर में हलचल पैदा कर दी है। दरअसल रूस की सेना के टॉप जनरल अलाउदिनोव ने कहा है कि इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमले के साथ अब तीसरा विश्व युद्ध शुरू हो चुका है। जनरल ने साफ तौर पर कह दिया है कि 10 लाख सैनिकों को युद्ध के लिए तैयार किया जाए। उधर चीन भी ईरान के पक्ष में बोला है। ऐसे कयास लगाया जा रहा है कि अब चीन और रूस खुलकर ईरान के साथ आ सकते हैं। मतलब इजरायल और चीन युद्ध के बीच दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका रूस और चीन शामिल हो रहे हैं। वैसे भी ईरान ने अमेरिका के सामने आत्मसमर्पण करने के इनकार कर दिया है।
यहां से शुरू हो सकता है तीसरा विश्व युद्ध
अगर तीसरा विश्व युद्ध शुरू होता है तो वह पश्चिमी एशिया से शुरू होगा। टकराव बढ़ा तो इसमें कई देश शामिल हो सकते हैं। ऐसे में अब प्रश्न उठता है कि युद्ध किन-किन देशों के बीच हो सकता है और कहां पर होगा ? इसमें दो राय नहीं कि इस वक्त अमेरिका सबसे शक्तिशाली देश है और वो रूस व चीन अमेरिका के प्रतिद्वंदी देश माने जाते हैं। अमेरिका के साथ यूरोपीय देश भी इस जंग में शामिल हो सकते हैं, वहीं नॉटो देश भी अमेरिका का साथ दे सकते हैं, वहीं दूसरे गुट में चीन, रूस, उत्तर कोरिया और अरब देश शामिल हो सकते हैं।
दरअसल ईरान और इजराइल के बीच खूनी संघर्ष चल रहा है, जिससे दुनिया हैरान है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह तीसरे विश्व युद्ध का ट्रेलर है? अगर ऐसा है तो क्या युद्ध की चिंगारी पूरी दुनिया को अपनी जद में ले लेगी, क्योंकि दोनों देश एक-दूसरे को तबाह करने की धमकी दे रहे हैं और अमेरिका भी इस जंग में कूदने की फिराक में है। यदि विश्व युद्ध होता है तो मुस्लिम देश ईरान के पक्ष में खड़े हुए दिखाई देंगे। भारत तटस्थ भूमिका निभा सकता है। अमेरिका जंग में इजराइल का साथ दे रहा है और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कह दिया है कि जब तक ईरान के सारे परमाणु ठिकाने तबाह नहीं हो जाते हैं, तब तक ये हमले नहीं रुकेंगे और चीन और रूस हमले के खिलाफ हैं। ऐसे में आखिर युद्ध रुके भी तो कैसे ?






