दिल्ली देहात के किसानों ने 12 वर्षों के अन्याय पर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को सौंपा विस्तृत ज्ञापन — लैंड पूलिंग नीति की अवैध शर्तें तुरंत हटाने की मांग

•लैंड पूलिंग की चारों अवैध व किसान-विरोधी शर्तें हटाने की मांग

•मास्टर प्लान 2041 में स्मार्ट विलेज और प्लॉट योजना लागू करने पर जोर

•जमीन के मालिकाना हक, कलेक्टर रेट वृद्धि और देहात में कैंपस–स्टेडियम की मांग

दिल्ली | आज दिल्ली देहात मोर्चा के प्रतिनिधि-मंडल ने राहुल गांधी, नेता प्रतिपक्ष (लोकसभा) से देश की सबसे बड़ी पंचायत संसद भवन में मुलाक़ात की और दिल्ली देहात पर पिछले 12 वर्षों से हो रहे अन्याय का विस्तृत तथ्य-पत्र सौंपा। इस मौके पर दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र यादव भी मौजूद रहे। प्रतिनिधियों ने कहा कि मौजूदा सरकार ने संविधान और कानून की अनदेखी करते हुए ऐसी नीतियाँ लागू की हैं, जिनसे देहात के हजारों किसान अपने मूल अधिकारों और जमीन से वंचित हो रहे हैं।  
प्रतिनिधियों ने विशेष रूप से लैंड पूलिंग पॉलिसी में शामिल चार असंवैधानिक और किसान-विरोधी शर्तों — 5 एकड़ की अनिवार्यता, लगभग 20 करोड़ रुपये तक का बाहरी विकास शुल्क, 40% जमीन मुफ्त देने की मजबूरी, और बिल्डरों के साथ समूह बनाने की बाध्यता — को तुरंत वापस लेने की मांग रखी। किसानों ने इसे “आज़ाद भारत के इतिहास का सबसे बड़ा धोखा” बताया।
मोर्चा ने राहुल गांधी से अनुरोध किया कि वे दिल्ली देहात का दौरा करें और इन मुद्दों को संसद के शीतकालीन सत्र में मजबूती से उठाएँ। किसानों का कहना है कि यह लड़ाई अब केवल जमीन की नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की है।  
प्रतिनिधि-मंडल ने यह भी मांग की कि दिल्ली मास्टर प्लान 2041 में नए “स्मार्ट विलेज” बसाए जाएँ और 36 बिरादरियों को उनकी ही जमीन से प्लॉट आवंटित करने की “सबको प्लॉट – स्मार्ट विलेज” योजना लागू की जाए। साथ ही 17 साल पुराने कलेक्टर रेट को 10 करोड़ रुपये प्रति एकड़ तक संशोधित करने, तथा 74/4 जमीन वाले किसानों को खेत और प्लॉट का मालिकाना हक़ लौटाने की मांग रखी गई।  
किसानों ने खून के रिश्तों वाली गिफ्ट डीड पर स्टांप शुल्क समाप्त करने, नजफ़गढ़ में वेस्ट कैंपस, कंझावला–बवाना क्षेत्र में नॉर्थ-वेस्ट कैंपस, और दिल्ली देहात में अंतरराष्ट्रीय मानक का स्पोर्ट्स स्टेडियम स्थापित करने की भी मांग रखी। उनके अनुसार देहात को शिक्षा, खेल और अवसंरचना से जोड़ना सरकार की बुनियादी जिम्मेदारी है।  
दिल्ली देहात मोर्चा के संस्थापक राजीव यादव ने कहा कि “दिल्ली देहात बारह वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा में खड़ा है। हमारी जमीन, हमारे अधिकार और हमारे भविष्य पर संकट मंडरा रहा है। हमने राहुल गांधी जी से निवेदन किया है कि वे देहात आएँ और संसद में हमारी आवाज़ बनें। यह संघर्ष सिर्फ जमीन का नहीं, बल्कि हमारे सम्मान और अस्तित्व का है।”
मुलाक़ात करने वाले प्रतिनिधि-मंडल में दिल्ली देहात मोर्चा के संस्थापक राजीव यादव के अलावा दिलबाग सिंह, चौखराज सिंह, शीशराम (पूर्व प्रधान), देवेंद्र डागर, जगदीश यादव (सेवानिवृत्त भारतीय वायुसेना), लेखचंद रांगा, रोहताश राणा, साहब सिंह, डॉक्टर रामनिवास यादव, तनिष्क, पुष्कर यादव, हरेंद्र फलसवाल,और मीनू वर्मा शामिल थे।

 

 

 

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