लोकसभा में बजट सत्र के दौरान भारी हंगामा मचा हुआ है, खासकर विपक्ष के नेता राहुल गांधी को बोलने का मौका न मिलने को लेकर। विपक्ष (मुख्य रूप से कांग्रेस और सहयोगी दल) का आरोप है कि लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने पहले आश्वासन दिया था कि राहुल गांधी को राष्ट्रपति के अभिभाषण या बजट चर्चा से पहले बोलने दिया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
इसके चलते सदन में विपक्ष ने हंगामा किया, जिससे लोकसभा की कार्यवाही बार-बार स्थगित हो रही है (जैसे 9वें और 10वें दिन सिर्फ कुछ मिनट चली)। हंगामे के बीच विपक्ष ने स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव (No-Confidence Motion against Speaker) लाने की तैयारी शुरू कर दी है। सूत्रों के अनुसार:
प्रस्ताव के लिए कम से कम 50 सांसदों का समर्थन जरूरी है (कुछ रिपोर्ट्स में 100+ हस्ताक्षर का दावा भी है, जैसे कांग्रेस, सपा, DMK आदि से)।
इसे पेश करने से 14 दिन पहले लिखित नोटिस देना अनिवार्य है।
संविधान के अनुच्छेद 94 के तहत यह संभव है, लेकिन इतिहास में ऐसे प्रस्ताव आमतौर पर खारिज हो जाते हैं।
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा:
विपक्ष प्रस्ताव ला सकता है, यह संसदीय लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन उनके पास संख्या बल (बहुमत) नहीं है, इसलिए स्पीकर को हटा नहीं सकते।
इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।
विपक्ष ने स्पीकर के पद का अपमान किया है — स्पीकर की मेज, कुर्सी, अधिकारियों की टेबल पर चढ़ गए और स्पीकर के कमरे में भी हंगामा किया।
विपक्ष संसद नहीं चलने दे रहा है, और वे नियमों का पालन नहीं करते।
राहुल गांधी के “स्पीकर ने कमिटमेंट किया” वाले दावे पर रिजिजू ने कहा कि कोई ऐसा कमिटमेंट नहीं था, और वे खुद स्पीकर के साथ मौजूद थे।






