यह विवाद तब शुरू हुआ जब हजारीबाग के उमेश प्रसाद मेहता ने सुजॉय घोष पर उनकी अप्रकाशित स्क्रिप्ट ‘सबक’ की चोरी का आरोप लगाया. मेहता ने दावा किया कि उनकी स्क्रिप्ट पर ही फिल्म ‘कहानी 2’ बनाई गई है. उन्होंने कॉपीराइट एक्ट की धारा 63 के उल्लंघन के लिए निर्देशक के खिलाफ आपराधिक केस दर्ज करवाया था।
मेहता का कहना था कि उन्होंने 2015 में घोष से अपनी स्क्रिप्ट साझा की थी। इसके पीछे उनका उद्देश्य अपनी स्क्रिप्ट के कॉपीराइट रजिस्ट्रेशन के लिए घोष से एक सिफारिश पत्र पाना था. लेकिन घोष ने बिना उन्हें जानकारी दिए उनकी स्क्रिप्ट पर फिल्म बना दी। मेहता की याचिका पर 7 जून 2018 को CJM कोर्ट ने सुजॉय घोष को समन जारी किया था. इसके खिलाफ वह झारखंड हाई कोर्ट गए. 22 अप्रैल 2025 को हाई कोर्ट ने कहा कि उसे समन के स्तर पर दखल देने की जरूरत नहीं लगती. फिल्म निर्देशक को CJM कोर्ट में जा कर अपनी बात रखनी चाहिए।
हाई कोर्ट से राहत पाने में असफल रहे निर्देशक ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उनकी दलील थी कि उन्होंने फिल्म की स्क्रिप्ट 2012 में लिखी थी और दिसंबर 2013 में ‘स्क्रीन राइटर्स एसोसिएशन’ के पास उसका रजिस्ट्रेशन भी करवा लिया था। ऐसे में शिकायतकर्ता का यह दावा बेबुनियाद है कि उसने 2015 में उन्हें फिल्म की स्क्रिप्ट दी।
घोष की तरफ से यह दलील भी दी गई कि सिविल प्रकृति के विवाद को आपराधिक केस के तौर पर दायर किया गया। केस मुंबई की जगह हजारीबाग दायर करने का मकसद भी उन्हें परेशान करना लगता है। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्ष की दलीलें सुनने के बाद 10 मार्च को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस पी एस नरसिम्हा और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने फैसला सुरक्षित रखा था. अब सुजॉय घोष को राहत दे दी है।







