जयपुर। राजस्थान में निर्मल चौधरी की गिरफ्तारी ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है। जयपुर पुलिस ने 21 जून 2025 को राजस्थान विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष और कांग्रेस नेता निर्मल चौधरी को 2022 के एक मामले में हिरासत में लिया, जिसमें उन पर गैरकानूनी जमावड़ा और सरकारी काम में बाधा डालने का आरोप है। यह गिरफ्तारी तब हुई जब चौधरी विश्वविद्यालय में अपनी पीजी परीक्षा देने पहुंचे थे। उनके साथ कांग्रेस विधायक अभिमन्यु पूनिया को भी हिरासत में लिया गया, हालांकि पूनिया को बाद में रिहा कर दिया गया।
नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस कार्रवाई को अलोकतांत्रिक करार देते हुए कहा कि परीक्षा के दौरान छात्रों और विधायक को हिरासत में लेना सरकार की तानाशाही मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने इसे युवाओं और जनता की आवाज को दबाने की कोशिश बताया। सचिन पायलट ने भी इसकी निंदा की, इसे लोकतंत्र पर हमला बताते हुए कहा कि सरकार असहमति की आवाजों को कुचलना चाहती है। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
दूसरी ओर, डीसीपी (पूर्व) तेजस्विनी गौतम ने कहा कि चौधरी के खिलाफ 2022 में दर्ज मामले में कार्रवाई जरूरी थी। बीजेपी समर्थकों का कहना है कि यह कार्रवाई कानून के तहत है और सरकार अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं करेगी। इस घटना ने कांग्रेस और बीजेपी के बीच तीखी बयानबाजी को जन्म दिया है, जिसमें कांग्रेस इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रही है, जबकि बीजेपी इसे कानूनी कार्रवाई का हिस्सा मान रही है।

