भारतीय रेलवे में नॉन-वेज थाली को लेकर झटका vs हलाल का विवाद फिर से गरमा गया है। हाल ही में सिख संगठनों की याचिका पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने बड़ा कदम उठाया है। NHRC ने रेलवे बोर्ड, FSSAI (भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण), और संस्कृति मंत्रालय के सचिवों को नोटिस जारी किया है। आयोग का कहना है कि अगर रेलवे में केवल हलाल मीट ही परोसा जा रहा है, तो यह यात्रियों के भोजन विकल्प के अधिकार का उल्लंघन हो सकता है।
खास तौर पर सिख रहत मर्यादा का हवाला दिया गया है, क्योंकि सिख धर्म में हलाल मीट का सेवन वर्जित है। NHRC सदस्य प्रियंक कानूनगो ने इस मुद्दे पर जोर दिया कि सिखों को अपनी धार्मिक आचार संहिता के अनुसार भोजन का अधिकार मिलना चाहिए।
NHRC ने पारदर्शिता की कमी पर भी सवाल उठाए हैं। रेलवे की पहले दी गई रिपोर्ट को “अपूर्ण” और “पारदर्शिता की कमी” वाला बताया गया। आयोग ने IRCTC से नया एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) मांगा है, जिसमें सभी फूड वेंडर्स/ठेकेदारों की पूरी लिस्ट होनी चाहिए। साथ ही यह स्पष्ट करना होगा कि प्रत्येक वेंडर द्वारा परोसा जाने वाला नॉन-वेज मीट हलाल है, झटका है, या दोनों।
यह विवाद पिछले साल नवंबर 2025 से चल रहा है, जब विभिन्न शिकायतों (जिनमें हिंदू, सिख और दलित समुदायों के प्रतिनिधित्व वाली संस्थाओं की शिकायतें शामिल थीं) पर NHRC ने रेलवे को पहला नोटिस जारी किया था। रेलवे का पक्ष रहा है कि उनके पास हलाल-सर्टिफाइड भोजन परोसने का कोई आधिकारिक नियम नहीं है, और वे सिर्फ FSSAI मानकों का पालन करते हैं।
विवाद का सार
यह मुद्दा धार्मिक स्वतंत्रता, उपभोक्ता अधिकार, और पारदर्शिता से जुड़ा है। कई लोग चाहते हैं कि ट्रेनों में भोजन मेन्यू में स्पष्ट रूप से बताया जाए कि मीट हलाल तरीके से तैयार है या झटका से, ताकि यात्री अपनी पसंद और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चुन सकें। NHRC ने संस्कृति मंत्रालय से भी कहा है कि सभी सार्वजनिक खान-पान संस्थानों में इस तरह की जानकारी अनिवार्य रूप से उपलब्ध होनी चाहिए।







