बीजेपी के चक्रव्यूह को भेदने वाले राहुल गांधी !

चरण सिंह
प्रतिपक्ष नेता राहुल गांधी ने भले ही अब लोकसभा में बजट पर बोलते हुए बीजेपी पर जनता के जवाब से बचने के लिए चक्रव्यूह रचने का आरोप लगाया हो। पर जमीनी हकीकत तो यह है कि बीजेपी नेतृत्व ने तो विपक्ष को फांसने के लिए लोकसभा चुनाव से पहले ही एक चक्रव्यूह की रचना रच दी थी। इंडिया गठबंधन के सूत्रधार जदयू मुखिया नीतीश कुमार को इंडिया गठबंधन से अलग करना, रालोद मुखिया जयंत चौधरी और एनसीपी नेता रहे अजित पवार को एनडीए में लाना भी उस चक्रव्यूह का एक हिस्सा था। विपक्ष नेताओं को ईडी, सीबीआई और इनकम टैक्स की छापेमारी से डराना भी उस चक्रव्यूह का ही एक द्वार ही था। बसपा मुखिया मायावती को इंडिया गठबंधन में शामिल न होने देना इसी चक्रव्यूह रचने की श्रेणी में था। हां राहुल गांधी ने अपनी कार्यकुशलता का परिचय देते हुए इस चक्रव्यूह रचने का भेदन किया और भाजपा को अपने दम पर बहुमत न लेने दिया। वह कांग्रेस का घोषणा पत्र और राहुल गांधी का महिलाओं को साल में एक लाख रुपये देने का वादा ही था जिसमें भाजपा नेतृत्व उलझ कर रह गया। विशेषकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सारी ऊर्जा कांग्रेस के घोषणा पत्र की आलोचना में बीत गई। अब लोकसभा में राहुल गांधी ने बीजेपी के चक्रव्यूह की चर्चा की है।
दरअसल जिन राहुल गांधी को भाजपा नेता पप्पू कहते नहीं थकते थे, वही राहुल गांधी अब लोकसभा में भाजपा के लिए आफत बने हुए हैं। लोकसभा में राहुल गांधी ने जो आक्रामक रुख अपनाया है उससे भाजपा के लिए दिक्कत खड़ी हो गई हैं। जहां पहले सत्र में राहुल गांधी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हर मोर्चे पर घेरा वहीं बजट सत्र में राहुल गांधी ने बजट का जवाब देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरा वहां अंबानी और अडानी का नाम ले बीजेपी सांसदों को शोर मचाने को मजबूर कर दिया। यह राहुल गांधी की सत्तापक्ष को घेरने की रणनीति ही थी कि जो प्रधानमंत्री पिछले कार्यकाल में कह रहे थे कि वह अकेले विपक्ष पर भारी हैं वही प्रधानमंत्री अब कह रहे हैं कि विपक्ष ने उन्हें पांच घंटे तक नहीं बोलने दिया।
राहुल गांधी ने लोकसभा में आरोप लगाया है कि बीजेपी ने अपनी खामियों को छुपाने के लिए देश की जनता को फांसने के लिए एक चक्रव्यूह की रचना की है। इस चक्रव्यूह में जहां किसान, मजदूरों को फंसाने का प्रयास किया गया वहीं छोटे कारोबारी और नौकरीपेशा लोग इसमें फंसे हुए हैंं। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार चक्रव्यूह रचती रही और वह इस चक्रव्यूह को तोड़ते रहे। उन्होंने मनरेगा, जीएसटी और नोटबंदी की बात करते हुए कहा कि जनता को हर तरह से चक्रव्यूह में फंसाने की कोशिश की गई।
उन्होंने किसानों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि किसान मात्र अपनी फसल की खरीद पर कानून की गारंटी ही तो मांग रहे हैं। उन्होंने लोगों को आश्वस्त किया कि जब वे लोग सत्ता में आएंगे तो फसल खरीद की कानूनी गारंटी देंगे। आजकल लोकसभा में राहुल पूरे रंग में दिखाई दे रहे हैं। कहना गलत न होगा कि अब राहुल गांधी परिपक्व नेता बन गये हैं। बातों को बनाना और घुमाना वह पूरी तरह से जान गये हैं। अक्सर जींस टीशर्ट में दिखने वाले राहुल गांधी घुमा फिराकर पीएम मोदी खिलाफ मोर्चा खोल ही देते हैं। राहुल गांधी ने इंटर्न योजना को धता बताकर कहा कि इस तरह से तो यह लोग एक भी युवा को रोजगार नहीं मिल पाएगा।

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