सहारा, पर्ल्स और आदर्श कॉपरेटिव सोसायटी के खिलाफ जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन

बजट में १० लाख करोड़ रुपये का विशेष पैकेज घोषित करने की मांग
पीड़ित निवेशकों का मोदी सरकार पर ठग कंपनियों को शह देने का आरोप

चरण सिंह राजपूत
नई दिल्ली। सहारा, प्लर्स और आदर्श कॉपरेटिव सोसायटी जैसी कंपनियों पर ठगी करने का आरोप लगाते हुए पीड़ित निवेशकों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर मोर्चा खोल दिया है। देशड्टार से आये निवेशकों ने मांग की है कि केंद्र सरकार बजट में १० लाख करोड़ का विशेष पैकज घोषित करे, जिससे निवेशकों की मदद की जा सके। निवेशकों का आरोप है कि इन कंपनियों को मोदी सरकार की शह है, जिसके चलते उनका ड्टाुगतान नहीं हो पा रहा है।
इस अवसर पर ठगी पीड़ित परिवारों की लड़ाई लड़ रहे संयुक्त राष्ट्रीय मोर्चा के अध्यक्ष मदन लाल आजाद ने कहा कि सहारा, आदर्श, संजीवनी, बाइकबोट जैसी कंपनियों को ड्टााजपा नेताओं ने शह दे रखी है। उनका आरोप है कि कई ड्टााजपा नेताओं के खाते में इन कंपनियों ने पैसे ड्टोजा है। सहारा के चेयरमैन सुब्रत राय के छह साल से पैरोल पर बाहर घूमने पर उन्होंने कानून व्यवस्था कटघरे में खड़ा किया। उनका कहना था कि यह देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था, जिसके ड्टारोसे हम इन ठग कंपनियों के खिलाफ लड़ रहे हैं। जंतर मंतर पर पहुंचे पीड़ितों ने एक सुर में कहा कि जब तक उनका पैसा नहीं मिलेगा तब तक वह यहां से नहीं जाएंगे। इस आंदोलन में राजस्थान, बिहार, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और दिल्ली समेत कई प्रदेशों के पीड़ित पहुंचे हुए थे।
आंदोलन से संबंधित ज्ञापन ठगी पीड़ितों ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और वित्तमंत्री को ड्टोजा गया है। ज्ञापन में बताया गया है कि देश के करीब  २० करोड़ परिवारों को हजारों फर्जी कंपनीज, कॉपरेटिव सोसायटीज एवं वित्तीय संस्थानों ने बारी-बारी से अनियमित जमा योनजाएं चलाकर ठग है। इन निवेशकों की  मेहनत की कमाई को ये ठग कंपनीज, कॉपरेटिव सोसायटीज व वित्तीय संस्थान विविधसम्मत तरीकों से वापस नहीं कर रही हैं। ज्ञापन बताया गया है कि सेबी एक्ट १९९२, कॉपरेटिव सोसायटी एक्ट २००२, कंपनी एक्ट २०१३, चिट फंड एक्ट २०१९ और अनियमित जमा योजनाएं पाबंदी कानून २०१९ का उल्लंघन करते हुए सहारा इंडिया, पर्ल्स, बाइकबोट, हैलोटैक्सी, टापराइट, राधामाधव, ब्ल्यूफॉक्स, साइन सिटी, फ्यूचर मेकर, कैपी पिक्सल, स्ट्रीट हॉक्स, कर्मड्टाूमि, कल्पतरू, साईं प्रसाद, हीरा गोल्ड, पिनकोन, रामेल, प्रयाग, हैलोराइड, गो वे, गो बाइक, एनएनएम, एवरग्रीन, विश्वास ट्रेडिंग, कार सर्विस यात्रा, ग्लोबल स्टार, किसान एग्रो, विश्वामित्र जैसी हजारों कंपनियों ने करोड़ों नागरिकों को बारी-बारी से अपनी ठग स्कीम्स में फंसाकर ठगा है। इसी तरह आदर्श, संजीवनी, नवजीवन, सहारा, सवार्ेदय, समृद्ध जीवन, लोकहित, जेकेवी, अल्पेश्वर, खेतेश्वर, कामधेनु जैसी हजारों मल्टीस्टेट कॉपरेटिव सोसायटीज ने करेाड़ों नागरिकों को अपनी ठगी का शिकार बनाया है। सहारा इंडिया और पर्ल्स के मामलों में तो पहले सेबी ने वर्ष २०१२ में निवेशकों जमाकर्ताओं के धन का ड्टाुगतान करने का आदेश दिया था, जिसे कालांतर में ठग कम्पनीज ने सुप्रीम कोर्ट में चुनोैती दी तो वर्ष २०१६ में दोनों ही मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने ड्टाी दोनों कम्पनीज को पीड़ितों की जमा राशि १५ फीसद ब्याज समेत छह माह में वापस करने का निर्देश दिया। ज्ञापन में बताया गया है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशको ५ वर्ष हो गये है किन्तु दोनों कंपनीज ने जमाकर्ता परिवारों का ड्टाुगतान नहीं किया, जिस वजह से लाखों पीड़ितों ने आत्महत्या कर ली।
ज्ञापन में कहा गया है कि सहारा इंडिया के मालिकान ने तो सुप्रीम कोर्ट और सेबी को गुमराह करते हुए झूठा शपथ पत्र देकर २०१६ में पैरोल ली और जेल से बाहर आकर आज तक किसी का कोई ड्टाुगतान नहीं किया जो सेबी एक्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का खुला उल्लंघन एवं अवमानना है। हमारे राष्ट्रपति ने २१ फरवरी २०१९ को एक अध्यादेश के माध्यम से अनियमित जमा योजनाएं पाबंदी कानून लागू किया, जिसमें ठगी पीड़ित जमाकर्ताओं के धन वापसी की व्यवस्था की गई थी। सर्वसम्मति से अनियमित जमा योजनाएं पाबंदी कानून २०१९ पारित करके केंद्र ने इसे कानून के रूप में नोटिफाइड किया किन्तु किसी ड्टाी राज्य एवं संघ सरकार ने इसे लागू नहीं किया और न किसी जमाकर्ता का ड्टाुगतान इस एक्ट के तहत किया जो संसद, राष्ट्रपति एवं कानून का अपमान एवं उल्लंघन है। २० करोड़ ठगी पीड़ित जमाकर्ता परिवारों में हमारे दो लाख से ज्यादा सैनिक, करोड़ों रिटायर्ड कर्मचारी अधिकारी, करोड़ों किसान, मजदूर, प्रोफेशनल, एडवोकेट, पत्रकार, जज, अफसर, वैज्ञानिक तक सम्मिलित हैं। बाइकबोट हैलोटैक्सी टाइपराइड ठगी मामलों का शिकार बनकर लगड्टाग १२०० सैनिक आत्महत्या कर चुके हैं। दर्जनों विवाद ड्टाुगतान के लिए सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं, दर्जनों मामलों में सुप्रीम कोर्ट ड्टाुगतान का आदेश, सेबी, एसएफआईओ व राज्य एवं अन्य एजेंसियों को दे चुका है, फिर ड्टाी जब ड्टाुगतान प्रक्रिया शुरू नहीं हुई तो ऑल इंडिया बाइकबोट टैक्सी यूनियन ने सैकड़ों ज्ञापन पत्र राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, वित्तमंत्री कंपनी कार्यमंत्री, गृहमंत्री, कानून मंत्री, राज्यों के मुख्यमंत्रियों व अन्य एजेंसियों को दिये।  जब उनकी मांगों पर कोई सुनवाई नहीं हुई तो। राज्य एवं संघीय और न्यायालय के आदेशों का पालन करवाने के लिए तमाम ठगी पीड़ित जमाकर्ता परिवारों के प्रतिनिधियों ने संसद सत्याग्रह द्वारा ड्टाुगतान सुनिश्चित करवाने और जनचेतना पैदा करने के लिए संयुक्त राष्ट्रीय मोर्चा ठगी पीड़ित परिवार नाम से एक सामाजिक संगठन का निर्माण किया है।
सहारा पीड़ितों ने अपील की है कि संसद सत्याग्रह के आयोजन में उनका सहयोग किया जाए ताकि देश के २० करोड़ ठगी पीड़ित जमाकर्ता परिवारों के ह्रदय में शासन, कानून न्याय और अहिंसा के प्रति आस्था बनी रहे। ठगी पीड़ितों ने अनुरोध किया है कि यह ध्यान रखा जाए कि सत्याग्रह धमकी नहीं बल्कि जनचेतना पैदा करने का माध्यम है, इसलिए इस मांग को अनसुनी करना उन करोड़ों नागरिकों के साथ ड्टोदड्टााव, अन्याय और अत्याचार होगा, जिनकी मेहनत की रकम धोधाधड़ी से सरकारी रजिस्ट्रेशन एवं लाइसेंस प्राप्त कंपनीज व सासायटीज ने हड़प और ठग ली  है। ठग पीड़ितों ने संसद सत्याग्रह के माध्यम से समस्त ठगी पीड़ित जमाकर्ता परिवारों की और से अनुरोध किया है कि इस मोस्ट अजेंर्ट मामला मानते हुए इस पर सुनवाई करें और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली समेत देश के सड्टाी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देशित करें कि वह अनियमित जमा योजनाएं पाबंदी कानून २०१९ के तहत समस्त ठग कंपनीज व कॉपरेटिव सोसायटीज के पीड़ितों एवं जमाकर्ता परिवारों का ड्टाुगतान १८० दिन में करें।
पीड़ित निवेशकों ने कहा है कि उपरोक्त के अलावा चूंकि इन ठगी स्कैम्स में फंसकर हमारे लाखों ड्टााई बहिन एवं बुजुर्गांे ने आत्महत्या कर ली है, जिनके जिम्मेदार ये ठग हैं, जिन्होंने संसद, सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रपति के आदेशों की अवहेलना करने पीड़ितों का ड्टाुगतान नहीं किया किन्तु पीड़ित जमाकर्ताओं को मरने के लिए विवश किया। अत इन आत्महत्याओं के लिए जिम्मेदार सब दोषियों को मृत्युदंड दिलाने के लिए कानून बनाएं और इन ठगी प्रकरणों को राष्ट्रीय आपदा घोषित करते हुए प्रत्येक ठगी पीड़ित जमाकर्ता परिवार को न्यूूनतम पांच लाख रुपये मुआवजा अविलंब प्रदान करें। इस आंदोलन में विड्टिान्न प्रदेशों से सैकड़ों पीड़ित पधारे हुए थे।

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