FIR का आधार और धाराएं
पहली FIR: धोखाधड़ी (IPC की धारा 420) से संबंधित। इसमें यूनिवर्सिटी पर छात्रों को गुमराह करने और फर्जी दस्तावेज जारी करने के आरोप हैं।
दूसरी FIR: जालसाजी (IPC की धारा 465-471) के तहत। यह UGC को गलत जानकारी देने और प्रमाणपत्रों में हेरफेर से जुड़ी है।
ये FIR दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने ओखला स्थित यूनिवर्सिटी के खिलाफ दर्ज की हैं। पुलिस ने यूनिवर्सिटी को नोटिस जारी कर दस्तावेज मांगे हैं, और टीम ने कैंपस का दौरा भी किया।
ब्लास्ट से यूनिवर्सिटी का कनेक्शन
ब्लास्ट की साजिश में अल-फलाह यूनिवर्सिटी के कई डॉक्टर और एमबीबीएस छात्र शामिल पाए गए हैं। मास्टरमाइंड डॉ. मुजम्मिल की गिरफ्तारी के बाद जांच में यूनिवर्सिटी के 2 डॉक्टर (डॉ. मोहम्मद और डॉ. मुस्तकीम) का नाम सामने आया, जो मुजम्मिल और विस्फोट करने वाले डॉ. उमर नबी के संपर्क में थे।
यूनिवर्सिटी कैंपस से डॉ. शाहीन सईद की ब्रेजा कार बरामद हुई, जो ब्लास्ट से जुड़ी जांच का हिस्सा है। कुल 15 डॉक्टरों के फोन बंद हैं, और 2 डॉक्टर समेत 3 लोग हिरासत में हैं। इनके डॉ. गनई से संबंधों की जांच चल रही है।
यूनिवर्सिटी के फाउंडर जावेद अहमद सिद्दीकी का आपराधिक इतिहास भी सामने आया है – वे पहले जेल जा चुके हैं, और 9 कंपनियों से जुड़े मामले हैं।
हाल ही में 8 प्रोफेसरों ने इस्तीफा दिया, जो जांच के दबाव का संकेत देता है। NIA और हरियाणा पुलिस ने कैंपस में छापेमारी की।
जांच की ताजा अपडेट
आजतक के स्टिंग ऑपरेशन में यूनिवर्सिटी पर E&D (प्रवर्तन निदेशालय) और फॉरेंसिक ऑडिट का दबाव उजागर हुआ।
J&K पुलिस और अन्य एजेंसियां डॉक्टरों के आतंकी नेटवर्क पर शिकंजा कस रही हैं।
पुलिस का फोकस: यूनिवर्सिटी से लीक हुए दस्तावेजों और फर्जीवाड़े पर, जो ब्लास्ट साजिश को छिपाने में इस्तेमाल हुए हो सकते हैं।
यह मामला दिल्ली-NCR में सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन चुका है। जांच जारी है, और आगे की कार्रवाई में यूनिवर्सिटी पर और सख्ती हो सकती है। अधिक अपडेट के लिए आधिकारिक स्रोतों पर नजर रखें।








