उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 2017 में सत्ता संभालने की कहानी हमेशा से रहस्यमयी रही है। कई कयास लगाए जाते रहे कि आखिर किसने और कैसे यह फैसला लिया। लेकिन हाल ही में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने इसकी पूरी सच्ची कहानी खोल दी है। उन्होंने बताया कि यह फैसला दिल्ली में उनके घर पर ही लिया गया था, और वे खुद इसके साक्षी बने।
कहानी की शुरुआत: 2017 चुनावों के बाद
2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में भाजपा और उसके सहयोगियों ने शानदार जीत हासिल की थी। पार्टी को बहुमत मिला, लेकिन मुख्यमंत्री का चेहरा कौन होगा, यह सस्पेंस बना रहा। तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने इस फैसले को अंजाम दिया। रविवार को लखनऊ में एक कार्यक्रम के दौरान पीयूष गोयल ने भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए यह किस्सा साझा किया। उन्होंने कहा, “मेरे घर अमित शाह जी आए। उन्होंने योगी जी को मेरे सामने ही फोन किया और कहा- ‘आपको लखनऊ जाना है, यूपी सरकार की कमान संभालनी है।'”
गोयल ने आगे बताया कि यह पल बेहद रोमांचक था। योगी आदित्यनाथ उस वक्त गोरखपुर से सांसद थे और हिंदू महासभा के प्रमुख संत के रूप में जाने जाते थे। लेकिन शाह का यह कॉल उनके राजनीतिक सफर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। गोयल ने जोर देकर कहा कि यूपी उनके लिए खास है, क्योंकि उन्होंने यहां से ही अपनी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत की थी।
योगी का सफर: संन्यास से सत्ता तक
याद रहे, योगी आदित्यनाथ (जन्म नाम अजय सिंह बिष्ट) ने 1990 के दशक में संन्यास लेकर गोरखनाथ मठ से जुड़ गए थे। वे 2014 से सांसद थे, लेकिन मुख्यमंत्री बनना उनके लिए अप्रत्याशित था। शाह के इस फैसले ने न सिर्फ यूपी की राजनीति बदल दी, बल्कि योगी को ‘बुलडोजर बाबा’ के रूप में स्थापित कर दिया। गोयल की यह बातें भाजपा के आंतरिक कार्यक्रम में कही गईं, जहां उन्होंने यूपी के प्रति अपने ‘करीबी संबंध’ का भी जिक्र किया।
यह कहानी न सिर्फ योगी के उदय को दर्शाती है, बल्कि भाजपा की रणनीतिक सोच को भी उजागर करती है। अगर आप वीडियो या और डिटेल्स चाहें, तो हाल के इंटरव्यू या कार्यक्रमों की क्लिप्स देख सकते हैं।








