विश्व बैंक की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति बेहद नाजुक है। देश की लगभग 45% आबादी गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रही है और इस वर्ष गरीबों की संख्या में और वृद्धि होने की आशंका है। कुल सार्वजनिक कर्ज 2023 में 62.88 ट्रिलियन रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में 13.64 ट्रिलियन रुपये की वृद्धि दर्शाता है। बाहरी कर्ज 2024 में 130 बिलियन डॉलर से अधिक हो गया, जिसमें से 20% से ज्यादा चीन को देनदारी है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान की सेना पर बजट का बड़ा हिस्सा (लगभग 18-25%) खर्च हो रहा है, जो आर्थिक संकट के बावजूद बढ़ रहा है। 2024-25 में रक्षा बजट में 17.6% की वृद्धि हुई, जो 2.12 ट्रिलियन रुपये तक पहुंच गया। यह राशि कर्ज चुकाने और सामाजिक कल्याण के लिए आवश्यक संसाधनों को प्रभावित कर रही है। आईएमएफ और विश्व बैंक से बार-बार लिए गए बेलआउट पैकेज (1950 से अब तक 25 बार) के बावजूद, कर्ज का बोझ और कम विदेशी मुद्रा भंडार (फरवरी 2025 में 13.15 बिलियन डॉलर) आर्थिक सुधार को मुश्किल बना रहे हैं।
हालांकि, कुछ सुधार के संकेत दिखे हैं। मुद्रास्फीति 2023 में 29% से घटकर अप्रैल 2025 में 0.7% तक पहुंच गई, जो 30 साल में सबसे कम है। विदेशी मुद्रा भंडार भी जून 2024 तक 9.4 बिलियन डॉलर तक बढ़ा। फिर भी, कर्ज चुकाने के लिए 2024-25 में 24.6 बिलियन डॉलर की जरूरत है, जिसमें से 3.8 बिलियन डॉलर चीन को चुकाने हैं। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि सैन्य खर्च और कर्ज पर निर्भरता के कारण पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था स्थायी सुधार से दूर है। पाकिस्तान को इस संकट से उबरने के लिए संरचनात्मक सुधार, कर संग्रह में वृद्धि, और गैर-जरूरी खर्चों, खासकर सैन्य बजट, में कटौती की जरूरत है। साथ ही, पारदर्शी आर्थिक नीतियों और विदेशी निवेश को बढ़ावा देने की आवश्यकता है।






