‘पाकिस्तान को बदलना पड़ा सैन्य ढांचा’, CDS जनरल अनिल चौहान ने बताया ऑपरेशन सिंदूर का असर  

भारतीय सेना के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने शुक्रवार को कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान को मजबूर कर दिया कि वह अपने संविधान और उच्च सैन्य संगठन में बदलाव करे। यह साफ संकेत है कि यह ऑपरेशन पाकिस्तान के पक्ष में नहीं गया। पुणे पब्लिक पॉलिसी फेस्टिवल 2026 में गोखले इन्स्टिट्यूट ऑफ पॉलिटिक्स एंड इकोनॉमिक्स (GIPE) में बोलते हुए जनरल चौहान ने कहा कि ऑपरेशन के बाद पाकिस्तान ने जो कदम उठाए, जैसे कि सैन्य कमांड संरचना में बदलाव, यह दिखाता है कि वहां संघर्ष के दौरान गंभीर कमियां थीं. पाकिस्तान ने जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमिटी के अध्यक्ष के पद को खत्म कर दिया और इसके बजाय चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज बनाया. इसके साथ ही नेशनल स्ट्रेटेजी कमांड और आर्मी रॉकेट फोर्सेज कमांड भी बनाई गई।

जनरल चौहान ने कहा कि इससे भूमि, संयुक्त और रणनीतिक सैन्य शक्तियां एक ही व्यक्ति के हाथ में केंद्रित हो गई हैं, उन्होंने कहा, ‘यह संयुक्तता के मूल सिद्धांत के खिलाफ है और भूमि-केंद्रित सोच को दिखाता है. ऐसा केंद्रीकरण पाकिस्तान की सेना के अंदर समस्याएं पैदा कर सकता है।

 

भारत की कमांड संरचना पर क्या पड़ा इसका असर

 

जब उनसे पूछा गया कि क्या ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की कमांड संरचना में बदलाव किए हैं, तो CDS ने साफ किया कि वह तीनों सेवा प्रमुखों पर सीधे कमांड नहीं रखते, लेकिन उनके पास परिचालन जिम्मेदारी होती है. चीफ ऑफ स्टाफ कमिटी के स्थायी अध्यक्ष के रूप में, उन्होंने कहा कि फैसले मिलकर लिए जाते हैं, जिससे योजना और क्रियान्वयन सही तरीके से हो. उन्होंने बताया कि CDS सीधे अंतरिक्ष, साइबर, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक और कॉग्निटिव युद्ध जैसे नए क्षेत्रों और इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ के तहत विशेष बलों की निगरानी करते हैं।

सैन्य रणनीति में बदलाव और भविष्य की युद्ध तैयारी

 

जनरल चौहान ने कहा कि दुनिया में सैन्य रणनीति बदल रही है और अब युद्ध में भूगोल की बजाय तकनीक अहम भूमिका निभा रही है। उन्होंने कहा, ‘पहले पानीपत से पलासी तक भूगोल सैन्य अभियान तय करता था, आज तकनीक रणनीति तय कर रही है.’ उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य के संघर्ष अधिकतर गैर-संपर्क और गैर-काइनेटिक होंगे, लेकिन पारंपरिक भूमि युद्ध अब भी कठिन और जनशक्ति-गहन रहेंगे, खासकर पाकिस्तान और चीन की विवादित सीमाओं पर. उन्होंने कहा, ‘हमें दोनों के लिए तैयार रहना होगा, स्मार्ट, तकनीक-आधारित युद्ध और पारंपरिक युद्ध, लेकिन कोशिश करेंगे पारंपरिक युद्ध से बचने की।

 

ऑपरेशन सिंदूर और पहले की कार्रवाईयों से सबक

जनरल चौहान ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर और पहले की कार्रवाइयों जैसे उरी सर्जिकल स्ट्राइक, डोकलाम और गलवान स्टैंडऑफ, और बालाकोट एयर स्ट्राइक से कई सीख मिली. इन ऑपरेशनों को नई, स्थिति-विशिष्ट कमांड व्यवस्था के तहत किया गया। उन्होंने कहा, ‘अब हम एक मानकीकृत प्रणाली बना रहे हैं जिसे सभी परिस्थितियों में लागू किया जा सके.’ जनरल चौहान ने भरोसा जताया कि संयुक्त थियेटर कमांड स्थापित करने का अधिकांश काम पूरा हो चुका है और उम्मीद जताई कि एकीकृत कमांड संरचना तय समय से पहले लागू हो जाएगी।

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