बीएमसी चुनाव में एआईएमआईएम की जबरदस्त सफलता से चिंतित हैं अखिलेश यादव, सपा से अच्छा रहा है प्रदर्शन
चरण सिंह
बीएमसी चुनाव में सपा से अधिक सीटें एआईएमआईएम की आने के बाद अखिलेश यादव को उत्तर विधानसभा चुनाव की चिंता सताने लगी है। इस चिंता का बड़ा कारण यह भी है कि उत्तर प्रदेश में चंद्रशेखर आज़ाद की पार्टी आज़ाद समाज पार्टी और असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम के गठबंधन की चर्चा जोरों पर है। लखनऊ में हुई सपा सांसदों की बैठक में यह चिंता देखी गई। ओवैसी का मुस्लिम वोटबैंक में बढ़ क्रेज और चंद्रशेखर आज़ाद से बढ़ती नजदीकियां इस मीटिंग का मुख्य मुद्दा रहा है। ऊपर से सपा के कद्दावर नेता आजम खान के जेल में जाने पर सपा के उनके पक्ष में न उतरने से मुस्लिम वोटबैंक में सपा के प्रति नाराजगी देखी जा रही है। देखने की बात यह है कि लोकसभा चुनाव में भले ही अखिलेश यादव आजम खान के उत्पीड़न का मुद्दा न उठा पाएं पर चंद्रशेखर आज़ाद ने यह मुद्दा मजबूत तरीके से उठाया था।
दरअसल ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम महाराष्ट्र में 13 नगर निगमों में 125 वार्डों में जीत हासिल की है। इन कई नगर निकायों में ओवैसी ने समाजवादी पार्टी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना जैसी स्थापित पार्टियों को पीछे छोड़ दिया। अखिलेश यादव की चिंता इस बात को लेकर है कि महाराष्ट्र में मुसलमानों ने सपा से अधिक एआईएमआईएम को पसंद किया और एआईएमआईएम 2027 में उत्तर प्रदेश में पूरे दमखम के साथ चुनाव लड़ने जा रही है। चंद्रशेखर आज़ाद की आज़ाद समाज पार्टी और एआईएमआईएम के गठबंधन की चर्चा ने अखिलेश यादव को और चिंतित कर दिया है।
दरअसल अखिलेश यादव भी जानते हैं कि नगीना से सांसद बने चंद्रशेखर आज़ाद का उत्तर प्रदेश के युवाओं में बड़ा क्रेज है। कई मामलों में चंद्रशेखर आज़ाद को बसपा मुखिया मायावती से भी अधिक पसंद किया जा रहा है। चंद्रशेखर आज़ाद की लोकप्रियता का आलम यह है कि उनकी रैलियों में भारी भीड़ देखने को मिलती है। मायवती ने भले ही अपने भतीजे आकाश आनंद को अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी बना दिया हो पर चंद्रशेखर आज़ाद का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है। पश्चमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर, मेरठ, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर समेत लगभग पूरे उत्तर प्रदेश में ठीक ठाक जनाधार है। ऐसे में यदि ओवैसी का साथ चद्रशेखर आज़ाद को मिल गया तो सपा के लिए दिक्कत पैदा हो सकती हैं। वैसे भी पश्चमी उत्तर प्रदेश में दलित-मुस्लिम गठबंधन बहुत काम करता है।
भले ही लोकसभा चुनाव में सपा को सबसे अधिक 37 सीटें मिल गई थी पर इस बार न केवल बीजेपी बल्कि बसपा भी सपा की घेराबंदी कर रही है। ऊपर से चंद्रशेखर आज़ाद और असदुद्दीन ओवैसी की जुगलबंदी। कांग्रेस से सपा के गठबंधन की उम्मीद भी बहुत कम है। देखने की बात यह है कि जानकारी मिल रही है कि बसपा गत चुनाव की तरह इस बार भी अधिकतर मुस्लिम प्रत्याशी चुनावी समर में उतारेगी। ऐसे में सपा की जबरदस्त घेराबंदी की तैयारी बीजेपी और बीएसपी की ओर से चल रही है।
देखने की बात यह है कि मेरठ दलित कांड मामले में चंद्रशेखर आज़ाद के रुख पर उनको गृह मंत्री अमित शाह की शह मिलने की बात किसान मजदूर संगठन की ओर से उठी थी। यह वही किसान मजदूर संगठन है, जिसके राष्ट्रीय अध्यक्ष पूरन सिंह की अगुआई में राजकोट के बीजेपी सांसद पुरुषोत्तम रुपाला के राजपूत राजाओं पर आपत्तिजनक बयान बाजी करने पर बीजेपी के खिलाफ पंचायतें की थी। मतलब बीएसपी के साथ ही एआईएमआईएम और आजाद समाज पार्टी की ओर से सपा की घेराबंदी बीजेपी का खेल ही मानी जा रही है। ऐसे में यदि सपा को कांग्रेस का साथ न मिला तो सपा के लिए दिक्कत पैदा हो सकती है।
वैसे भी बीएमसी चुनाव में ठाकरे परिवार को बुरी तरह से परास्त करने के बाद बीजेपी पश्चिमी बंगाल में ममता बनर्जी और फिर उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव की राजनीति खत्म करने में लग गई है। वैसे भी उत्तर प्रदेश में विधानसभा उप चुनाव में योगी आदित्यनाथ ने 10 में से 9 सीटें जीतकर सपा को बुरी तरह से परास्त किया था।