किसान संघर्ष समिति की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक संपन्न
लोकतंत्र बहाली – जंतर मंतर पर दावेदारी हेतु हो रहा है दूसरा राष्ट्रीय लोकतंत्र बहाली का आंदोलन
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR रद्द करने हेतु संयुक्त किसान मोर्चा एवं देशभर के जन संगठन सड़कों पर उतरेंगे
‘हर हाथ में तिरंगा, हर घर जंतर- मंतर’ के नारों के साथ होगा आंदोलन
किसान संघर्ष समिति की राष्ट्रीय कार्यकारी की बैठक राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ सुनीलम की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में 6 राज्यों के पदाधिकारी और प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्यों तथा जिला अध्यक्षों ने भाग लिया। बैठक को संबोधित करते हुए डॉ सुनीलम ने कहा कि देश के युवाओं ने 1974 के छात्र-छात्राओं के आंदोलन की तरह लोकतंत्र की बहाली और व्यवस्था की जवाबदेही तय करने का संघर्ष शुरू किया है। गोदी मीडिया और सरकार द्वारा युवा आंदोलन में शामिल युवा संगठनों, नागरिक संगठनों, किसान संगठनों और युवाओं के संघर्ष का समर्थन करने वाले विपक्षी दलों के बीच गलतफहमी पैदा करने का तथा भ्रम फैलाने का प्रयास किया जा रहा है लेकिन आंदोलनकारियों का नेतृत्व समूह पुलिस दमन के बावजूद मोदी- शाह की तानाशाही को खत्म करने के लिए तेजी से आगे बढ़ रहा है।
डॉ सुनीलम ने कहा कि जिस तरह अंग्रेजों ने तिरंगा झंडा लेकर चलने को गैर कानूनी घोषित किया था उसी तरह केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस ने तिरंगा लेकर कनॉट प्लेस पर चलने को गैर कानूनी घोषित कर दिया है। इसके बावजूद भी युवा जंतर-मंतर पर विरोध करने का अधिकार फिर से हासिल करने के लिए संघर्षरत है।
उन्होंने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा और देश के नागरिक संगठनों ने SIR रद्द करने, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कमर कस ली है तथा 23 अक्टूबर को ‘लोकतंत्र की बहाली दिवस’ मनाने के लिए जोरदार तैयारी कर रहे हैं। डॉ सुनीलम ने कहा किसान संघर्ष समिति के हर नेता और कार्यकर्ता को इस ऐतिहासिक आंदोलन को सफल बनाने के लिए तन मन धन से प्रयास करना चाहिए।
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रोफेसर सुशीला ताई मोराळे ने कहा कि देश के किसान युवाओं पर हो रही पुलिस की दमनात्मक कार्यवाही से आक्रोशित है तथा यह आक्रोश आगामी 23 अक्टूबर को देशभर की सड़कों पर दिखलाई पड़ेगा । उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के सभी जिलों में कार्यक्रम की तैयारी चल रही है।
राष्ट्रीय महासचिव एड शिव सिंह एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता चरण सिंह ने कहा कि सभी संगठनों को अपने झंडे और बैनर की चिंता किए बगैर लोकतंत्र बहाली के दूसरे राष्ट्रीय संघर्ष में जुड़ना चाहिए। उन्होंने देश के किसान नेताओं और नागरिक संगठनों के नेताओं से अपील की कि वें 23 अक्टूबर को फेसबुक लाइव करें, एक-दो मिनट के वीडियो बनाकर यूट्यूब पर अपलोड करें ताकि 23 अक्टूबर के कार्यक्रम का संदेश अधिक से अधिक नागरिकों तक पहुंच सके।
एड शिव सिंह ने बताया कि 23 अक्टूबर के कार्यक्रम के लिए विंध्य के सभी जिलों में तैयारी की जा रही है।
मध्य प्रदेश की प्रदेश अध्यक्ष एड आराधना भार्गव ने कहा कि किसान संघर्ष समिति प्रदेश में 6 न्यूक्लियर पावर प्लांट के खिलाफ छिंदवाड़ा को केंद्र बिंदु बनाकर कार्यवाही कर रही है।
उन्होंने कहा कि पेंच व्यपवर्तन परियोजना से प्रभावित किसानों को न्याय दिलाने के लिए हम सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता संजय पारीक के माध्यम से संघर्ष कर रहे हैं। बिहार के अध्यक्ष तेज प्रताप यादव, उत्तराखंड, उड़ीसा हिमाचल प्रदेश के अध्यक्षों ने भी बैठक को संबोधित किया।
कार्यकारिणी की बैठक में 25 जिलों के जिला अध्यक्ष शामिल हुए।
कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह शंकु ने कहा कि 23 अक्टूबर और 26 नवंबर की तैयारी जोर-शोर से चल रही है पिछली बार दिल्ली किसान आंदोलन के समर्थन में रीवा में 380 दिन का पक्का मोर्चा लगाया था इस बार भी हम संघर्ष के लिए तैयार है।
मालवा निमाड़ क्षेत्र संयोजक रामस्वरूप मंत्री ने कहा कि हमने 2 अक्टूबर को सफलतापूर्वक संयुक्त किसान मोर्चा मध्य प्रदेश का सम्मेलन किया है, 23 अक्टूबर का कार्यक्रम भी हम मिलकर करेंगे।
संदीप ठाकुर ने कहा कि सरकार ने किसान को खाद के लिए ई टोकन के लिए लाइन में लगा दिया है। किसान खाद के लिए 50 से 100 किलोमीटर भटक रहा है। सागर का किसान दमोह और दमोह का किसान सागर खाद लेने आ रहा है।
सिंगरौली के जिला अध्यक्ष अशोक सिंह पैगाम और अखिलेश शाह ने कहा कि सिंगरौली में अडानी द्वारा पेड़ काटकर कोल माइंस का काम शुरू कर दिया है लेकिन सरकार अब गोल्ड माइन्स के नाम पर आदिवासियों – किसानों की जमीन छीनना चाहती है जिसके खिलाफ संघर्ष जारी रहेगा ।






