इसे आप किसी रूप में लें यह मैं आपके विवेक पर छोड़ता हूं पर मैं इसे कमजोर, डरपोक सरकार के रूप में देख रहा हूं। हमारे देश में कोई भी संगठन हो यदि उसको लेकर विदेश में टिप्पणी हो और सरकार चुप्पी साध ले तो इसका मतलब यह है कि उसकी कोई बड़ी मज़बूरी होगी। संगठन भी सत्तारूढ़ पार्टी का मातृ संगठन है।
मोदी सरकार कितने भी बड़े बड़े दावे करती घूम रही हो पर जमीनी हकीकत यह है कि पाकिस्तान युद्ध में अमेरिका के दबाव में सीजफायर किया गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत पर पहले 25 और फिर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया। चेतावनी देकर रूस से तेल खरीदना रुकवा दिया। तमाम प्रयास के बावजूद अमेरिका ने यह कहकर 18 प्रतिशत टैरिफ किया कि यदि रूस से तेल ख़रीदा तो 25 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया जाएगा। पीएम मोदी हैं कि सिर झुकाकर ट्रम्प की सभी बातें मानते जा रहे हैं। रूस से तेल खरीदने के लिए अमेरिका से अनुमति लेनी पड़ी है वह भी एक तय सीमा तक मिलेगा। इसे घुटने टेकना नीति ही कहा जाएगा कि डोनाल्ड ट्रम्प ने ट्रेड डील में अमेरिका के किसानों के लिए भारत का कृषि बाजार खुलवा लिया।
युद्ध नहीं बुद्ध की बात करने वाले भारत के प्रधानमंत्री ईरान पर हमले से एक दिन पहले इजरायल पहुंचे। क्या जरूरत थी ? मोदी ने इजरायल की संसद में भाषण तो दिया पर इजराइल की तकनीक भारत के गांव गांव तक ले जाने की बात की वह युद्ध नहीं बुद्ध की बात करना भूल गए। इजरायल ने एक स्कूल पर हमला कर 150 से ऊपर छात्राओं की हत्या कर दी पर मोदी ने कोई संवेदना व्यक्त न की। अब तो उनके मातृ संगठन पर बात आ गई है पर मोदी की हिम्मत एक शब्द भी बोलने की नहीं हो रही है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि मोदी देश के लिए कितने कमजोर, कायर और प्रधानमंत्री साबित हो रहे हैं।
दरअसल अमेरिका की एक सरकारी संस्था यूनाइटेड स्टेट्स कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम (USCIRF) ने अपनी 2026 वार्षिक रिपोर्ट 4 मार्च को जारी की है। इस रिपोर्ट में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर लक्षित प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की गई है। रिपोर्ट में साफ़ लिखा है कि “Impose targeted sanctions on individuals and entities, such as India’s Research and Analysis Wing and the Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS), for their responsibility and tolerance of severe violations of religious freedom by freezing those individuals’ or entities’ assets and/or barring their entry into the United States.”







