UP : अब राजपूतों को कैसे मनाएगा बीजेपी नेतृत्व ?

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चरण सिंह 

भले ही बीजेपी ने अबकी बार 400 के पार का नारा दिया हो पर जिस तरह से राजकोट से प्रत्याशी पुरुषोत्तम रुपाला की अमर्यादित टिप्पणी के बाद राजपूत समाज ने बीजेपी के खिलाफ बगावत की है। जिस तरह से राजपूत समाज ने बीजेपी को हराने का संकल्प लिया है। ऐसे में बीजेपी को बड़ी मुश्किल का सामना करना पड़ सकता है। पहले ही चरण के चुनाव में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की मुजफ्फरनगर, कैराना, बिजनौर, नगीना, सहारनपुर, मुरादाबाद और रामपुर सीटें प्रभावित होने जा रही हैं। आज की परिस्थिति में बीजेपी नेतृत्व के लिए राजपूतों को मनाना मुश्किल लग रहा है। बीजेपी नेतृत्व के लिए दिक्कत भरी बात यह है कि यदि रूपाला को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा जाए तो गुर्जर समाज के नाराज होने का अंदेशा है। अब राजपूत समाज को आखिर मनाये तो मनाये कैसे ?

 

बीजेपी ने सोचा न भी होगा कि जो राजपूत समाज उसे लामबंद होकर समर्थन देता रहा है वह उससे बगावत भी कर देगा। बगावत भी ऐसी कि उसे हराने पर आमादा हो जाए। जी हां इस बार उस क्षेत्र से बीजेपी के खिलाफ राजपूतों ने आवाज बुलंद की है जहां से जिस क्षेत्र के राजपूत कभी बीजेपी के खिलाफ मुंह तक नहीं खोलते थे। यह आवाज उस क्षेत्र से उठी जहां से किसानों के हित में आवाज उठती रही है। सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, गौतमबुद्धनगर जिले किसान आंदोलन के लिए चर्चित रहे हैं। इस बार राजपूत समाज ने अपने मान सम्मान और अधिकार की लड़ाई के लिए कमर कसी है। बीजेपी के लिए परेशानी की बात यह है कि राजपूत समाज ने सीधे इस बात का संकल्प ले लिया है कि जो प्रत्याशी बीजेपी को हराएगा उसे वोट दिया जाएगा।

पंचायत की शुरुआत हुई जहां से भीम आर्मी की शुरुआत हुई थी। राजपूत समाज की पहली पंचायत सहारनपुर के ननौता में हुई और उसके बाद मेरठ के सिसौली, गौतम बुद्ध नगर नोएडा के सदरपुर गांव, खेड़ा सरधना और उसके बाद हापुड़ में राजपूत महापंचायत हुई है। 20 तारीख को घोड़ी बछेड़ा में राजपूत महापंचायत होने जा रही है। पंचायतों का यह सिलसिला जारी है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में राजपूत समाज के इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे ठाकुर पूरन सिंह ने स्पष्ट कर दिया है कि यह आंदोलन लगातार जारी रहेगा। राजपूत समाज ने लामबंद होकर भारतीय जनता पार्टी को समर्थन दिया पर बीजेपी नेतृत्व ने राजपूत समाज को अपमानित करने का काम किया है। उनका कहना है कि बीजेपी का एक नेता राजपूत समाज के खिलाफ टिप्पणी करे और भाजपा उस नेता पर एक्शन न ले। ऐसे में आंदोलन तो होगा ही।

दरअसल राजपूत समाज इसलिए भी ज्यादा आक्रोशित है क्योंकि अभी तक भाजपा ने राजपूतों के खिलाफ  अमर्यादित टिप्पणी करने वाले पुरुषोत्तम रुपाला के खिलाफ एक्शन नहीं लिया है। राजपूत समाज का कहना है कि राजनाथ सिंह ने अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष रहते हुए मोदी का नाम प्रधानमंत्री पद के लिए पेश किया और मोदी ने प्रधानमंत्री बनकर राजनाथ सिंह को ही दरकिनार करने की ठान ली। मोदी राजनाथ सिंह गृह मंत्री के पद पर रहते हुए ज्यादा दिन न झेल पाये। राजनाथ सिंह गृहमंत्री पद से हटाकर रक्षा मंत्री बना दिया। मोदी ने तो राजनाथ सिंह को पांचवें नंबर का नेता बना दिया था। आरएसएस के हस्तक्षेप के बाद राजनाथ दूसरे नंबर के नेता बने हैं।

अब राजपूत समाज को लगने लगा है कि पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह 2024 के लोकसभा के बाद योगी आदित्यनाथ को भी साइड लाइन कर सकते हैं। यही वजह है कि अब राजपूत समाज की पंचायत में नारा लगने लगा है कि योगी से बैर नहीं मोदी तेरी खैर नहीं। राजपूत समाज ने संकल्प ले लिया है कि इस बार बीजेपी को लोकसभा चुनाव हराना है। राजपूत समाज खुलेआम ऐलान कर कर रहा है कि यदि योगी आदित्यनाथ को प्रधानमंत्री नहीं बनाया जाता है तो बीजेपी का विरोध जारी रहेगा। अब देखना यह होगा कि इन लोकसभा चुनाव में बीजेपी राजपूत समाज को मना पाती है या फिर राजपूतों का आंदोलन जारी रहता है। कितना नुकसान भाजपा को राजपूत आंदोलन का होता है।

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