नई दिल्ली। जीएसटी काउंसिल ने हाल ही में लाइफ और हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर 18% जीएसटी को पूरी तरह से हटाने का फैसला किया है, जो 22 सितंबर से लागू होगा। इससे पॉलिसीधारकों को सीधा वित्तीय लाभ होगा।
कैलकुलेशन का उदाहरण
पहले की स्थिति: अगर आपका वार्षिक प्रीमियम 20,000 रुपये है, तो उस पर 18% जीएसटी यानी 3,600 रुपये अतिरिक्त देना पड़ता था। कुल भुगतान: 20,000 + 3,600 = 23,600 रुपये।
अब की स्थिति: जीएसटी शून्य होने से आपको केवल बेस प्रीमियम यानी 20,000 रुपये ही देने होंगे।
बचत: 23,600 – 20,000 = 3,600 रुपये प्रति वर्ष।
अब की स्थिति: जीएसटी शून्य होने से आपको केवल बेस प्रीमियम यानी 20,000 रुपये ही देने होंगे।
बचत: 23,600 – 20,000 = 3,600 रुपये प्रति वर्ष।
ध्यान देने योग्य बातें:
यह छूट व्यक्तिगत लाइफ और हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी (जैसे टर्म प्लान, यूलिप, और फैमिली फ्लोटर) पर लागू है।
हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि बीमा कंपनियां इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का लाभ खोने के कारण बेस प्रीमियम में 7-10% तक की वृद्धि कर सकती हैं। इससे बचत का कुछ हिस्सा (लगभग 1,000-1,500 रुपये) कम हो सकता है।
फिर भी, कुल मिलाकर प्रीमियम की लागत में कमी आएगी, जिससे बीमा अधिक किफायती होगा और ज्यादा लोग इसे खरीद सकेंगे।
हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि बीमा कंपनियां इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का लाभ खोने के कारण बेस प्रीमियम में 7-10% तक की वृद्धि कर सकती हैं। इससे बचत का कुछ हिस्सा (लगभग 1,000-1,500 रुपये) कम हो सकता है।
फिर भी, कुल मिलाकर प्रीमियम की लागत में कमी आएगी, जिससे बीमा अधिक किफायती होगा और ज्यादा लोग इसे खरीद सकेंगे।
इस फैसले से मध्यम वर्ग और वरिष्ठ नागरिकों को विशेष रूप से राहत मिलेगी, क्योंकि हेल्थ इंश्योरेंस का प्रीमियम, खासकर सीनियर सिटीजंस के लिए, पहले काफी महंगा था।








