हिजाब मामले में नहीं आया कोई फैसला, सुनवाई फिर हुई स्थगित

द न्यूज 15  
नई दिल्ली। कर्नाटक हिजाब विवाद को लेकर हाईकोर्ट में पांचवें दिन भी सुनवाई हुई। याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने अदालत में अपनी दलीलें रखीं। गुरुवार इस पर कोई फैसला नहीं आया और सुनवाई शुक्रवार भी जारी रहेगी।
आज कर्नाटक हाई कोर्ट ने एक सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा दायर याचिकाओं में से एक को यह कहते हुए खारिज कर दिया गया कि यह सुनवाई के योग्य नहीं है। कर्नाटक हाई कोर्ट ने सामाजिक कार्यकर्ता का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिवक्ता रहमतुल्ला कोतवाल से कहा कि आप इतने महत्वपूर्ण मामले में अदालत का कीमती समय बर्बाद कर रहे हैं।
वकील की दलील,  मुस्लिम लड़कियों का मानसिक स्वास्थ्य हो रहा प्रभावित : वहीं, इस मामले में एक याचिकाकर्ता अधिवक्ता विनोद कुलकर्णी, जिनकी याचिका विचाराधीन है, कर्नाटक हाईकोर्ट से कहा कि यह मुद्दा उन्माद पैदा कर रहा है और मुस्लिम लड़कियों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है। उन्होंने कम से कम शुक्रवार को मुस्लिम लड़कियों को हिजाब पहनने की अनुमति देने के लिए अंतरिम राहत की मांग की।
5 छात्राओं का प्रतिनिधित्व करने वाले सीनियर वकील एएम डार ने कर्नाटक हाईकोर्ट के समक्ष कहा कि हिजाब पर सरकार के आदेश से उनके मुवक्किलों पर असर पड़ेगा जो हिजाब पहनते हैं। उन्होंने कहा कि यह आदेश असंवैधानिक है। अदालत ने डार से अपनी वर्तमान याचिका वापस लेने और नई याचिका दायर करने को कहा।
बुधवार को दी गई थीं ये दलीलें : इससे पहले इस मामले पर बुधवार को भी सुनवाई हुई थी। इस दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से जिरह करते हुए अधिवक्ता रवि वर्मा कुमार ने कहा कि अकेले हिजाब का ही जिक्र क्यों है जब दुपट्टा, चूड़ियां, पगड़ी, क्रॉस और बिंदी जैसे सैकड़ों धार्मिक प्रतीक चिन्ह लोगों द्वारा रोजाना पहने जाते हैं। इससे पहले याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता रहमथुल्ला कोठवाल ने मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा (यूडीएचआर) का हवाला देते हुए कहा कि यूडीएचआर के अनुसार, सभी को धर्म की स्वतंत्रता और अंतरात्मा की स्वतंत्रता है।
वहीं, हिजाब विवाद को लेकर कर्नाटक हाई कोर्ट ने एक सामाजिक कार्यकर्ता की याचिका को  भी खारिज कर दिया। पीठ ने कहा, हम संतुष्ट नहीं हैं कि यह जनहित याचिका नियमों के अनुसार दायर की गई है। वहीं, गुरुवार को शिक्षण संस्थानों में हिजाब पहनने को लेकर अनुमति को लेकर दायर याचिका फिर स्थगित हो गई है। अब मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार को होगी।
उन्होंने कहा कि मैं केवल समाज के सभी वर्गों में धार्मिक प्रतीकों की विविधता को उजागर कर रहा हूं। सरकार अकेले हिजाब को चुनकर भेदभाव क्यों कर रही है? चूड़ियां पहनी जाती हैं? क्या वे धार्मिक प्रतीक नहीं है? कुमार ने कहा, यह केवल उनके धर्म के कारण है कि याचिककर्ता को कक्षा से बाहर भेजा जा रहा है। बिंदी लगाने वाली लड़की को बाहर नहीं भेजा जा रहा, चूड़ी पहने वाली लड़की को भी नहीं। क्रॉस पहनने वाली ईसाइयों को भी नहीं, केवल इन्हें ही क्यों। यह संविधान के आर्टिकल15 का उल्लंघन है।

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