नए रेंट एग्रीमेंट : मकान मालिक और किराएदार दोनों के लिए संतुलित बदलाव

भारत सरकार ने ‘न्यू रेंट एग्रीमेंट 2025’ को लागू कर दिया है, जो मॉडल टेनेंसी एक्ट (MTA) 2021 पर आधारित है। इसका मुख्य उद्देश्य किरायेदारी को पारदर्शी, आसान और विवाद-मुक्त बनाना है। अब न तो मकान मालिक मनमानी कर सकेंगे और न ही किराएदार बिना वजह परेशान करेगा। ये नियम किराये के बाजार को मानकीकृत करेंगे, जिससे दोनों पक्षों को सुरक्षा मिलेगी।

प्रमुख बदलाव क्या हैं?

 

रजिस्ट्रेशन अनिवार्य: हर रेंट एग्रीमेंट साइन होने के 2 महीने के अंदर रजिस्टर कराना जरूरी। बिना रजिस्ट्रेशन के एग्रीमेंट वैध नहीं माना जाएगा।
सिक्योरिटी डिपॉजिट पर सीमा: रिहायशी संपत्ति के लिए अधिकतम 2 महीने का किराया (पहले 6-10 महीने तक मांगते थे)। कमर्शियल प्रॉपर्टी के लिए 6 महीने तक।
किराया बढ़ोतरी की प्रक्रिया: साल में केवल एक बार बढ़ाया जा सकता है, और इसके लिए मकान मालिक को 90 दिन पहले लिखित नोटिस देना होगा।
बेदखली पर रोक: मकान मालिक बिना उचित नोटिस (पीरियड) और प्रक्रिया के किराएदार को घर खाली नहीं करा सकेगा।
डिजिटल भुगतान अनिवार्य: ₹5,000 से ज्यादा किराए पर नकद भुगतान बंद; UPI या बैंक ट्रांसफर से ही चुकाना होगा।
TDS सीमा बढ़ी: सालाना किराया ₹6 लाख तक TDS-मुक्त (पहले ₹2.4 लाख था)।
मानक टेम्पलेट: सभी एग्रीमेंट के लिए एक स्टैंडर्ड फॉर्मेट, ताकि अनुचित शर्तें न जोड़ी जा सकें।
विवाद निपटान: स्पेशल रेंट कोर्ट और ट्रिब्यूनल बनेंगे, जो 60 दिनों में केस सुलझाएंगे।

 

मकान मालिक के लिए फायदे

 

मनमानी शर्तें थोपने पर कानूनी रोक लगेगी, लेकिन डिजिटल रिकॉर्ड से किराया ट्रैकिंग आसान हो जाएगी।
TDS छूट बढ़ने से ज्यादा कमाई हाथ में रहेगी।
किराया न मिलने पर तेजी से ट्रिब्यूनल में शिकायत कर सकेंगे।
संपत्ति सुधार पर राज्य योजनाओं से टैक्स लाभ मिलेगा।

किराएदार के लिए फायदे

कम डिपॉजिट से वित्तीय बोझ कम होगा; अचानक रेंट हाइक या बेदखली का डर खत्म।
रजिस्टर्ड एग्रीमेंट से लीगल सुरक्षा मजबूत होगी।
विवादों का जल्दी समाधान, जिससे तनाव कम।
पारदर्शी प्रक्रिया से किरायेदारी ज्यादा सुरक्षित और आसान।

 

 

जुर्माना और सजा

 

 

रजिस्ट्रेशन न कराने पर ₹5,000 तक का जुर्माना। अगर नियम तोड़े गए तो कोर्ट के जरिए अतिरिक्त पेनल्टी लग सकती है।

 

रजिस्ट्रेशन कैसे करें?

राज्य की ऑनलाइन प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन वेबसाइट (जैसे राज्य पोर्टल) पर जाएं या नजदीकी रजिस्ट्रार ऑफिस में।
दोनों पक्षों के ID प्रूफ (आधार, PAN) अपलोड करें।
किराया, शर्तें और अवधि भरें।

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