बात सितंबर माह की है, जब इज़राइल ने कतर की राजधानी दोहा में हमास के अधिकारियों को निशाना बनाने के लिए मिसाइल हमले किए थे। यह हमला शांति वार्ता और बंधकों की रिहाई के बीच हुआ, जिससे कतर के साथ इज़राइल के रिश्ते खराब हो गए। कतर हमास के साथ मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा था, इसलिए यह रिश्ता महत्वपूर्ण था।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 29 सितंबर 2025 को व्हाइट हाउस में इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात के दौरान उन्हें कतर के प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी को फोन पर माफी मांगने को कहा। ओवल ऑफिस से ही यह कॉल हुई, जिसमें नेतन्याहू ने स्क्रिप्ट पढ़ते हुए कहा कि इज़राइल ने कतर की संप्रभुता का उल्लंघन किया, वे इसकी गलती मानते हैं और भविष्य में ऐसा नहीं होगा। इस माफी के बाद तीनों देशों (इज़राइल, कतर, अमेरिका) के बीच बेहतर संचार के लिए एक त्रिपक्षीय तंत्र बनाने पर सहमति बनी।
ट्रंप ने नेतन्याहू को ‘कोने में धकेल’ दिया था, लेकिन साथ ही उन्हें बचाया भी, क्योंकि यह कदम गाजा के बाद के शांति योजना (ट्रंप की 20-सूत्री योजना) को आगे बढ़ाने और बंदी रिहाई में मददगार साबित हुआ। नेतन्याहू के लिए यह अपमानजनक था, लेकिन ट्रंप का हस्तक्षेप ने इज़राइल को कूटनीतिक फायदे दिए। यह घटना सोशल मीडिया पर वायरल हुई, जहां फोटो शेयर की गई जिसमें नेतन्याहू फोन पर माफी मांगते दिखे।






