लीची में फल छेदक कीट का प्रबंधन करने की जरूरत : वैज्ञानिक

लीची में फल के लौंग के बराबर होने की अवस्था अति महत्वपूर्ण

 

सुभाषचंद्र कुमार
समस्तीपुर पूसा। डा राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविधालय के प्रोफेसर (डॉ ) एसके सिंह विभागाध्यक्ष,पोस्ट ग्रेजुएट डिपार्टमेंट ऑफ प्लांट पैथोलॉजी एवं नेमेटोलॉजी, प्रधान अन्वेषक, अखिल भारतीय फल अनुसंधान परियोजना ने बताया कि भारत में 92 हजार हेक्टेयर में लीची की खेती हो रही है जिससे कुल 686 हजार मैट्रिक टन उत्पादन होता है।

जबकि बिहार में लीची की खेती 32 हजार हेक्टेयर में होती है जिससे 300 मैट्रिक टन लीची का फल प्राप्त होता है। बिहार में लीची की उत्पादकता 8टन/हेक्टेयर है जबकि राष्ट्रीय उत्पादकता 7.4टन /हेक्टेयर है। इस समय बिहार में लीची में फल लग चुके है ,जो लौंग के बराबर के हो चुके है।अब आवश्यकता इस बात की है की फल अधिक से अधिक पेड़ पर लगे रहे एवं स्वस्थ रहे ।

इसके लिए बागवानों को वैज्ञानिकों की सलाह पर अमल करने की जरूरत है। लीची में फूल आने से लेकर फल की तुड़ाई के मध्य मात्र 70 से 75 दिन का समय मिलता है । इसलिए लीची उत्पादक किसान को बहुत सोचने का समय नहीं मिलता है। तैयारी पहले से करके रखने की जरूरत है। लीची की सफल खेती के लिए आवश्यक है की लीची में लगने वाले फल छेदक कीट को कैसे प्रबंधित करते है?

लीची में फल छेदक कीट का प्रकोप कम हो इसके लिए आवश्यक है की साफ -सुथरी खेती को बढ़ावा दिया जाय। लीची में फल बेधक कीट से बचने के लिए थायो क्लोप्रीड(Thiacloprid) एवं लमडा सिहलोथ्रिन(Lamda cyhalothrin) की आधा आधा मिलीलीटर दवा को प्रति लीटर पानी या नोवल्युरान @ 1.5 मीली दवा/लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।

लीची की सफल खेती में इसकी दो अवस्थाएं महत्वपूर्ण होती है, पहली जब फल लौंग के बराबर के हो जाते है एवं दूसरी अवस्था जब लीची के फल लाल रंग के होने प्रारंभ होते है । इन दोनो अवस्थावो पर फल बेधक कीट के नियंत्रण हेतु उपरोक्त दवा का छिड़काव अनिवार्य है । पूर्व वर्षो के अनुभव के आधार पर जिन लीची के बागों में फल के फटने की समस्या ज्यादा हो वहां के किसान 15 अप्रैल के आसपास बोरान @ 4 ग्राम / लीटर पानी में घोलकर छिडकाव करने से लीची के फल के फटने की समस्या में भारी कमी आती है।

इस समय रोग एवं कीड़ों की उपस्थिति के अनुसार रसायनों का प्रयोग करें। इस समय इमिडाक्लोरप्रीड (17.8 एस0एल0) @ 1मि0ली0 दवा प्रति दो लीटर पानी में और हैक्साकोनाजोल @ 1 मीली/ लीटर पानी या डाइनोकैप (46 ई0सी0) 1 मिली दवा प्रति 1 लीटर पानी में घोलकर छिड़कने से कीड़े एवं रोग की उग्रता में कमी आती है।

प्लेनोफिक्स नामक दवा @ 1 मिली प्रति 3 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करने से फल के गिरने में कमी आती है इस अवस्था में हल्की सिंचाई शुरू कर देनी चाहिए जिससे बाग की मिट्टी में नमी बनी रहे लेकिन इस बात का ध्यान देना चाहिए कि पेड़ के आस पास जलजमाव न हो।

यदि आप का पेड़ 15 वर्ष या 15 वर्ष से ज्यादा है तो उसमे 500-550 ग्राम डाइअमोनियम फॉस्फेट ,850 ग्राम यूरिया एवं 750 ग्राम म्यूरेट ऑफ़ पोटाश एवं 25 किग्रा खूब अच्छी तरह से सडी गोबर की खाद पौधे के चारों तरफ मुख्य तने से 2 मीटर दूर रिंग बना कर खाद एवं उर्वरकों का प्रयोग करना चाहिए ।

यदि आपका पेड़ 15 वर्ष से छोटा है तो उपरोक्त खाद एवं उर्वरक के डोज में 15 से भाग दे दे ,इसके बाद जो आएगा उसमे पेड़ की उम्र से गुणा कर दे यही उस पेड़ के लिए खाद एवं उर्वरकों का डोज होगा। फल का झडना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। प्रारंभिक अवस्था में जितना फल पेड़ पर लगता है, उसका मात्र 5-7 % फल ही पेड़ पर टिकता है बाकी फल झड़ जाता है।अनावश्यक कृषि रसायनों का छिड़काव नहीं करना चाहिए अन्यथा फल की गुणवक्तता प्रक्रिया प्रभाववित होगी।

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