कोलकाता। मुस्लिम आबादी: 2011 की जनगणना के अनुसार 27% (वर्तमान अनुमान 30-35% तक)। राज्य की 294 विधानसभा सीटों में से लगभग 100-112 सीटें ऐसी हैं जहां मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं (15-30%+ मुस्लिम आबादी वाले क्षेत्र)।
मुस्लिम बहुल जिले: मुर्शिदाबाद (66%), मालदा (51%), उत्तर दिनाजपुर (50%), बीरभूम, नदिया, दक्षिण 24 परगना आदि में मुस्लिम आबादी 25% से ज्यादा।
2021 विधानसभा चुनाव:
TMC ने 213 सीटें जीतीं (वोट शेयर ~48%)।
BJP ने 77 सीटें जीतीं (वोट शेयर ~38%)।
मुस्लिम प्रभाव वाली 112 सीटों में TMC ने 106 जीतीं, BJP सिर्फ 5।
30%+ मुस्लिम वाली सीटों में BJP का प्रदर्शन लगभग शून्य रहा।
Exit polls (Axis My India) के अनुसार ~75% मुस्लिम वोट TMC को मिले।
2024 लोकसभा चुनाव: मुस्लिम वोट TMC को और मजबूत हुए (~83% तक), CAA-NRC जैसे मुद्दों से मुस्लिमों में असुरक्षा की भावना बढ़ी, जो TMC के पक्ष में गई। मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में BJP का वोट शेयर: अक्सर 20-35% तक पहुंचा, लेकिन जीत बहुत कम। कई बूथों पर BJP को सिंगल-डिजिट या शून्य वोट मिले (2021 डेटा)।
ये आंकड़े दिखाते हैं कि मुस्लिम मतदाता TMC के साथ मजबूती से जुड़े हुए हैं, क्योंकि TMC खुद को अल्पसंख्यक सुरक्षा और “सेकुलर” विकल्प के रूप में पेश करती है। BJP की हिंदुत्व और “घुसपैठ” वाली रणनीति इन क्षेत्रों में उल्टी पड़ती है, जिससे वोट पोलराइजेशन TMC के फायदे में होता है।
2026 विधानसभा चुनाव में क्या “खेला” है?
बीजेपी का लक्ष्य: हिंदू वोट (65%+) को एकजुट करके और मुस्लिम वोट में सेंध लगाकर सरकार बनाना।
लेकिन मुस्लिम वोट बैंक में दरार की कोशिशें: हुमायूं कबीर (TMC से निकाले गए विधायक) ने नई पार्टी बनाई और मुस्लिमों को एकजुट करने का दावा किया। फुरफुरा शरीफ जैसे प्रभावशाली धार्मिक नेताओं में असंतोष (TMC विधायकों पर आरोप)।
TMC की ताकत: लक्ष्मी भंडार जैसी योजनाएं, महिला वोट, और मुस्लिमों में “दीदी” की छवि।
चुनौतियां: SIR (वोटर लिस्ट रिवीजन), वक्फ कानून, इमाम भत्ता न बढ़ना जैसे मुद्दे से कुछ नाराजगी, लेकिन अभी बड़ा ब्रेकअप नहीं दिख रहा।

