“मोदी का नाम लेकर सीएम दावेदारी!”—केरल में कांग्रेस के भीतर सियासी भूचाल, सतीशन बयान से घिरे

केरल में प्रचंड जीत के बाद सरकार गठन की कवायद के बीच कांग्रेस के भीतर नया विवाद खड़ा हो गया है. मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे माने जा रहे वी डी सतीशन अब अपने एक बयान को लेकर घिर गए हैं और यह बयान सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदर्भ से जुड़ा है.

दरअसल, सतीशन ने एक मीडिया हाउस को दिए इंटरव्यू में कहा कि “प्रशासनिक अनुभव कोई मुद्दा नहीं है. वी एस अच्युतानंदन के पास क्या अनुभव था? जब नरेंद्र मोदी मुख्यमंत्री बने, तब उनके पास क्या प्रशासनिक अनुभव था? वह एक पार्टी ऑर्गेनाइज़र थे, वरिष्ठ सांसद भी नहीं थे.”

यानी सतीशन ने अपने पक्ष में तर्क देते हुए मोदी के उदाहरण का सहारा लिया. लेकिन यही दांव अब उनके लिए उल्टा पड़ता दिख रहा है.

“मोदी का उदाहरण देना बड़ा रेड फ्लैग”—सोशल मीडिया पर विरोध सतीशन की इस टिप्पणी को लेकर पार्टी के भीतर और सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है. कई समर्थकों का मानना है कि मौजूदा राजनीतिक माहौल में मोदी की प्रशंसा करना और उसे अपनी दावेदारी के लिए इस्तेमाल करना “बड़ा रेड फ्लैग” है.

 

यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब कांग्रेस आलाकमान केरल में मुख्यमंत्री के चयन को लेकर मंथन कर रहा है. यानी, एक बयान ने सियासी समीकरणों को और जटिल बना दिया है.

 

 

“सीएम नहीं तो मंत्री भी नहीं”- सतीशन का सख्त रुख

 

 

इस पूरे घटनाक्रम के बीच सतीशन के रुख को लेकर भी खबरें सामने आई हैं. सूत्रों की माने तो बताया जा रहा है कि अगर उन्हें मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया, तो वे मंत्रिमंडल का हिस्सा नहीं बनेंगे और सिर्फ विधायक बने रहेंगे. सतीशन और उनके समर्थक सख्त रुख अख्तियार किए हुए हैं और CLP की बैठक के बाद निकलते समय पत्रकारों से बात भी नहीं की.

 

यह संकेत साफ करता है कि सतीशन अब अपनी दावेदारी को लेकर पूरी तरह आक्रामक मोड में हैं—जो पार्टी नेतृत्व के लिए नई चुनौती खड़ी कर सकता है. इस बीच “राहुल गांधी, वीडी सतीशन को मुख्यमंत्री बनाओ” मैसेज सोशल मीडिया पर 1 लाख से ज़्यादा कमेंट्स के साथ, वीडी सतीशन के सपोर्ट में समर्थक सोशल मीडिया रैली कर रहे हैं.

 

 

102 सीटों की जीत, लेकिन अंदरूनी खींचतान

 

 

140 सदस्यीय केरल विधानसभा में यूडीएफ ने 102 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि एलडीएफ 35 सीटों पर सिमट गया. यह जीत कांग्रेस के लिए वापसी का बड़ा मौका लेकर आई है. परावूर सीट से भारी अंतर से जीतने वाले सतीशन को इस जीत का प्रमुख चेहरा माना जा रहा है. उनके समर्थकों का तर्क है कि 2021 की हार के बाद सतीशन ने ही संगठन को खड़ा किया और पार्टी को सत्ता तक पहुंचाया, इसलिए मुख्यमंत्री पद पर उनका दावा सबसे मजबूत है.

 

CLP बैठक और आलाकमान की भूमिका

 

केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) दफ्तर में हुई CLP बैठक में सभी विधायकों से व्यक्तिगत राय ली गई. इस प्रक्रिया के तहत पार्टी पर्यवेक्षक मुकुल वासनिक और अजय माकन ने नेताओं से मुलाकात की. ओमन चांडी के बेटे और विधायक चांडी ओमन ने सार्वजनिक तौर पर किसी नाम का समर्थन करने से बचते हुए कहा, “मैंने पार्टी नेतृत्व को अपनी बात बता दी है. मैं सार्वजनिक तौर पर कुछ नहीं कहना चाहता. सही समय पर नेतृत्व फैसला करेगा.” उन्होंने यह भी जोड़ा कि “कांग्रेस का एक तय SOP है. हम जनता द्वारा चुने गए विधायक हैं. हमने अपनी राय दी है और पार्टी उसी आधार पर सही फैसला करेगी.”

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि कांग्रेस आलाकमान इस पूरे विवाद को कैसे संभालेगा. एक तरफ सतीशन का मजबूत दावा और समर्थकों का दबाव, दूसरी तरफ बयान से उपजा विवाद—दोनों के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं होगा. यह सिर्फ नेतृत्व चयन का मामला नहीं है, बल्कि पार्टी के वैचारिक संदेश और राजनीतिक लाइन से भी जुड़ा हुआ है. अगर सतीशन को नजरअंदाज किया जाता है, तो असंतोष का खतरा है. अगर उन्हें चुना जाता है, तो उनके बयान पर उठे सवालों का जवाब देना होगा.

 

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