चरण सिंह
बसपा मुखिया मायावती ने ऐसे ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश को अलग राज्य बनाने का दांव नहीं चला है। मायावती जानती हैं कि यदि एनडीए की सरकार फिर से बनती है तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस बार उत्तर प्रदेश उत्तर प्रदेश को चार राज्यों में बांट देंगे। उत्तर प्रदेश को पश्चिमांचल, अवध प्रदेश, बुंदेलखंड और पूर्वांचल चार राज्यों में बांटने की तैयारी चल रही है। ऐसे में मायावती जनता की वाहवाही लूटना चाहती हैं। हालांकि बीजेपी मुजफ्फरनगर, बिजनौर, मुरादाबाद और रामपुर के कुछ हिस्से को दूसरे प्रदेशों से जोड़ते हुए मुस्लिम बहुल जिलों से मुस्लिमों का वर्चस्व कम करना चाहती है। इसके चलते मुजफ्फरनगर का कुछ भाग हरियाणा, बिजनौर का कुछ भाग उत्तराखंड और ऐसे ही मुरादाबाद का कुछ भाग उत्तराखंड में मिलाया जा सकता है।
दरअसल मायावती ने अपने मुख्यमंत्रित्व काल 2011 में यूपीए सरकार को उत्तर प्रदेश को हरित प्रदेश, अवध, बुंदेलखंड और पूर्वांचल में बांटने का प्रस्ताव भेजा था। हालांकि यूपीए सरकार ने इस प्रस्ताव को लौटा दिया था। अब लोकसभा चुनाव में मायावती पश्चिमी उत्तर प्रदेश को अलग राज्य बनाने का शिगूफा छोड़ मुस्लिमों का वोट हासिल करना चाहती है। दरअसल पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुसलमान चाहते हैं कि यह अलग राज्य बने। मुस्लिम बहुल क्षेत्र होने की वजह से उनका इस क्षेत्र पर होल्ड हो जाएगा। पर भाजपा का कहना है कि यदि यह अलग प्रदेश बन जाता है तो मिनी पाकिस्तान बनकर रह जाएगा। मतलब उत्तर प्रदेश का बंटवारा तो होगा पर बीजेपी के हिसाब से। मतलब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के वजूद को कम किया जाएगा।
देखने की बात यह है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश को अलग राज्य बनाने की मांग आजादी की लड़ाई से चली आ रही है। हां यह बात जरूर है कि लंबे समय तक रालोद ने इसे मुद्दा बनाये रखा। रालोद ने हरित प्रदेश बनाने के लिए आंदोलन भी किया था। हालांकि चौधरी अजित सिंह इस मामले पर कभी गंभीर नहीं दिखाई दिये। जब 1999 में रालोद और भाजपा के समर्थन से मायावती सरकार चल रही थी तो चौधरी समरपाल सिंह ने हरित प्रदेश मुद्दे को विधानसभा में उठाया था। चौधरी अजित सिंह ने इस पर राजनीति कर दी। चौधरी समरपाल सिंह की कुछ न चली। बाद में धीरे-धीरे चौधरी अजित सिंह इस मुद्दे को भूल ही गये। अब मायावती ने इस मुद्दे को गरमा दिया है।
मायावती का प्रयास है कि दूसरे दलों को इस मुद्दे पर बोलने के लिए मजबूर करें। भले ही मायावती गत दिनों केंद्र सरकार के दबाव में थीं पर चुनाव प्रचार में भी वह जमकर बीजेपी पर निशाना साध रही हैं। बिजनौर, गौतमबुद्धनगर, घासी समेत कई सीटों पर बहुजन समाज पार्टी सीधे टक्कर में है। मायावती ने इन चुनाव में भी सोशल इंजीनियरिंग पर काम कर रही हैं। जैसे सपा ने पीडीए तो पल्लवी पटेल और ओवैसी ने पीडीएम बनाया है। ऐसे ही मायावती ने बीडीएम बनाया है। अब तक मायावती ने 45 टिकट घोषित किये हैं। इनमें से 15 सवर्णों में 7 को ब्राह्मणों को टिकट दिया है। अब देखना यह है कि मायावती का पश्चिमी उत्तर प्रदेश को अलग राज्य बनाने का दांव इन चुनाव में कितना असर दिखाता है।








