बीएसपी से जुड़ सकता है यूजीसी एक्ट से नाराज सवर्ण समाज
चरण सिंह
यूजीसी एक्ट के बीच बसपा मुखिया मायावती ने बड़ा दांव चल दिया है। ब्राह्मण भाईचारा सम्मेलन में मायावती ने सवर्णों के लिए आर्थिक आधार पर आरक्षण देने की मांग की है। उनका कहना है कि सवर्णों को 18 प्रतिशत या उससे अधिक आरक्षण की व्यवस्था संविधान में संशोधन कर देने की व्यवस्था की जाए।
दरअसल यूजीसी एक्ट लागू होने के बाद सवर्ण समाज बीजेपी के खिलाफ सड़कों उतर गया है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मेरठ, मुजफ्फनगर, बिजनौर, मुरादाबाद समेत देश के विभिन्न क्षेत्रों में यूजीसी एक्ट के खिलाफ प्रदर्शन शुरू हो गया है। लोकसभा चुनाव में राजकोट से सांसद पुरुषोत्तम रुपाला के राजपूत समाज पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने पर राजपूतों की पंचायतें करने वाली करनी सेना ने तो उग्र रूप धारण कर लिया है। बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने यूजीसी एक्ट के खिलाफ इस्तीफा दे दिया है।
सुप्रीम कोर्ट में यूजीसी एक्ट के खिलाफ एक जनहित याचिका दायर की गई है। ऐसे में मायावती ने सवर्णों की सहानुभूति बटोर ली जाए। वैसे भी 2007 में जब बसपा ने अपने दम पर सरकार बनाई थी तो ब्राह्मणों का सरकार बनाने में बहुत बड़ा योगदान रहा था। मायावती ने भी सतीश मिश्रा को अपनी पार्टी का महासचिव बनाकर दूसरे नंबर के नेता बना दिया था। ऐसे ही रामवीर उपाध्याय को विशेष सम्मान दिया था। आज भले ही राजपूतों में ठाकुर जयवीर सिंह बड़े नेता के रूप में उभरे थे। अब जब यूजीसी एक्ट के खिलाफ सवर्ण समाज मुखर है। ऐसे में मायावती मौके के फायदा उठाना चाहती है।
दरअसल समाजवादी पार्टी के पीडीए पर जोर देने की वजह से सवर्ण समाज समाजवादी पार्टी से तो नहीं जुड़ेगा पर मायावती से जुड़ सकता है। वैसे भी सपा सांसद रामजी लाल सुमन के राणा सांगा को गद्दार बोलने के बाद सवर्ण समाज समाजवादी पारित से नाराज है। ऐसे में यदि सवर्ण समाज मायावती के साथ हो लेता है तो मायावती 2027 के विधानसभा चुनाव बड़ा खेल कर सकती हैं। वैसे भी इंटरनल बीएसपी बड़े अभियान में लगी है। मायावती के भतीजे आकाश आनंद एक दलित विचारक के रूप में उभर सकते हैं। दरअसल आकाश आनंद जो भाषण देते हैं वह सरकारों को तथ्यों के आधार पर घेरते हैं।







