मल्लिकार्जुन खरगे का यह बयान हाल ही में (जनवरी 2025 में) सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी किया गया था, जिसमें उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भाजपा पर तीखा प्रहार किया। यह बयान RSS के 100 वर्ष पूरे होने के संदर्भ में आया, जब भाजपा और RSS ने स्वतंत्रता संग्राम में अपनी भूमिका को उजागर करने की कोशिश की। खरगे ने कांग्रेस की ओर से बाबासाहेब अंबेडकर के सम्मान पर फैलाई जा रही ‘झूठी अफवाहों’ का जवाब देते हुए RSS के इतिहास पर सवाल उठाए। आइए, इसकी पूरी डिटेल समझते हैं।
खरगे का पूरा बयान और आरोप
खरगे ने X पर लिखा:
“भाजपा, आरएसएस और उनके पूर्वजों ने भारतीय तिरंगे, हमारे संविधान, हमारे अशोक चक्र, बाबासाहेब अंबेडकर और हमारे स्वतंत्रता संग्राम का विरोध किया। आरएसएस ने नागपुर में अपने मुख्यालय पर 52 साल तक तिरंगा नहीं फहराया और कोर्ट के आदेश के बाद ही उन्हें मजबूरन फहराना पड़ा। भाजपा, आरएसएस और उनके पूर्वजों ने रामलीला मैदान पर महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू और बाबासाहेब डॉ. अंबेडकर के पुतले जलाए और भारतीय संविधान की प्रतियां जलाईं। मैं उन्हें चुनौती देता हूं कि इतिहास पढ़ें और बताएं कि राष्ट्रीय आंदोलन में उन्होंने क्या भूमिका निभाई।”
इसके अलावा, खरगे ने RSS पर ब्रिटिश समर्थन का भी आरोप लगाया, दावा किया कि RSS ने आजादी की लड़ाई में हिस्सा नहीं लिया और ब्रिटिश हुकूमत के साथ सहयोग किया। उन्होंने कांग्रेस के योगदान को रेखांकित किया, जैसे अंबेडकर को संविधान सभा में लाना, उन्हें कानून मंत्री बनाना और संसद में उनकी मूर्ति स्थापित करना।
ऐतिहासिक संदर्भ: 52 साल का ‘तिरंगा विवाद’
यह दावा नया नहीं है—यह 2022 से चला आ रहा है, जब ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के दौरान राहुल गांधी ने भी यही सवाल उठाया था।
तथ्य: RSS ने 1947 में स्वतंत्रता के समय नागपुर मुख्यालय पर तिरंगा फहराया था। लेकिन 1950 के बाद लगभग 52 वर्षों (2002 तक) तक इसे नहीं फहराया। 26 जनवरी 2001 को नागपुर कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर हुई, जिसमें RSS को तिरंगा फहराने का निर्देश दिया गया। उसके बाद RSS ने इसे शुरू किया।
RSS का पक्ष: RSS के समर्थक कहते हैं कि यह फ्लैग कोड (राष्ट्रीय ध्वज संहिता) की वजह से था। 2002 से पहले निजी संगठन तिरंगे को रोजाना नहीं फहरा सकते थे—केवल स्वतंत्रता/गणतंत्र दिवस पर। RSS ने हमेशा भगवा ध्वज को प्राथमिकता दी, लेकिन तिरंगे का सम्मान किया। RSS प्रमुख मोहन भागवत ने 2023 में कहा कि यह ‘नियमों का पालन’ था, न कि असम्मान।
आलोचकों का पक्ष: RSS के संस्थापक एम.एस. गोलवलकर की किताब ‘बंच ऑफ थॉट्स’ में तिरंगे को ‘हिंदू राष्ट्र’ के लिए अनुपयुक्त बताया गया। 1947 में RSS के मुखपत्र ‘ऑर्गनाइजर’ ने तिरंगे को “हिंदू हितों के लिए हानिकारक” कहा था। इतिहासकारों के अनुसार, RSS ने तिरंगे के बजाय भगवा झंडे को राष्ट्रीय ध्वज बनाने की मांग की थी।
यह विवाद RSS के स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका पर भी केंद्रित है। कांग्रेस का कहना है कि RSS ने ब्रिटिशों का साथ दिया (जैसे 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में भाग नहीं लिया), जबकि RSS दावा करता है कि उसके स्वयंसेवकों ने व्यक्तिगत रूप से आजादी की लड़ाई लड़ी।
प्रतिक्रियाएं
भाजपा/RSS की ओर से: तत्काल कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया, लेकिन पुराने बयानों में RSS ने इसे ‘झूठा प्रचार’ बताया। एक BJP नेता ने X पर कहा कि कांग्रेस खुद संविधान बदलने की कोशिश कर रही है।
सोशल मीडिया पर बहस: X पर #RSS100Year जैसे ट्रेंड्स में समर्थक और आलोचक आमने-सामने हैं। कुछ ने खरगे के दावों को ‘तथ्यपूर्ण’ कहा, तो कुछ ने फ्लैग कोड का हवाला देकर खारिज किया।






