जम्मू-कश्मीर सरकार ने आयुष्मान भारत PM-JAY SEHAT स्कीम के तहत अनावश्यक पेसमेकर और कार्डियक प्रक्रियाओं के एक बड़े रैकेट का पता लगने के बाद व्यापक जांच के आदेश दे दिए हैं। अनंतनाग के सरकारी मेडिकल कॉलेज (GMC) में हुई 103 सर्जरी संदिग्ध पाई गई हैं। सरकार ने कार्डियोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सैयद मकबूल अहमद शाह को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि कई मरीजों को ऐसी सर्जरी की जरूरत ही नहीं थी, फिर भी उन पर ‘डुअल चैंबर पेसमेकर इम्प्लांटेशन’ का क्लेम किया गया। वास्तव में उन पर ‘लेफ्ट बंडल ब्रांच एरिया पेसिंग’ (LBBAP) की गई. SKIMS के विशेषज्ञों के मूल्यांकन में 55 LBBAP केसों में से 27 (49%) मरीजों का लेफ्ट वेंट्रिकुलर फंक्शन पूरी तरह सामान्य पाया गया, जिससे सर्जरी का कोई मेडिकल आधार नहीं था।
कैशलेस स्कीम में भी लिया गया नकद भुगतान
जांच में सामने आया कि स्कीम के तहत मुफ्त इलाज का प्रावधान होने के बावजूद कई गरीब मरीजों से पैसे लिए गए। डॉक्टर पर डेटा में हेरफेरी और वित्तीय धोखाधड़ी का आरोप है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, डॉ. शाह द्वारा किए गए अधिकांश केसों में क्लिनिकल जरूरत साबित नहीं हुई।
स्वास्थ्य मंत्री ने दी जांच की पुष्टि
स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा मंत्री सकीना इत्तू ने मामले की पुष्टि करते हुए कहा कि विभाग ने पूरे मामले की गहन जांच शुरू कर दी है। उन्होंने बताया कि आरोपों की जांच लंबित रहने तक डॉ. शाह को GMC जम्मू के कार्यालय से संबद्ध किया गया है। सरकार ने धोखाधड़ी-रोधी इकाई (SAFU) की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की है। ऑडिट में TMS (ट्रांजैक्शन मैनेजमेंट सिस्टम) पर दर्ज 103 केस संदिग्ध पाए गए। स्वास्थ्य विभाग ने आश्वासन दिया है कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी. यह घोटाला जम्मू-कश्मीर में PM-JAY SEHAT स्कीम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा कर रहा है। विपक्षी दलों ने भी मामले में उच्चस्तरीय SIT जांच की मांग की है। आम जनता और मरीजों के संगठनों ने कहा है कि गरीबों के इलाज के लिए बने फंड का दुरुपयोग बेहद गंभीर अपराध है। स्वास्थ्य विभाग ने सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कार्डियोलॉजी विभाग की विशेष ऑडिट शुरू करने के निर्देश भी जारी कर दिए हैं।

