श्री आत्म मनोहर जैन आराधना मंदिर में महावीर जयंती के उपलक्ष्य में हुआ कार्यक्रम
करनाल, (विसु) । विधायक जगमोहन आनंद ने वीरवार को महावीर जयंती के उपलक्ष्य में इंद्री रोड स्थित श्री आत्म मनोहर जैन आराधना मंदिर में आयोजित कार्यक्रम में शिरकत की तथा भगवान महावीर के चरणों में नमन किया।
इस मौके पर विधायक जगमोहन आनंद ने भगवान महावीर जयंती की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भगवान महावीर जी का जीवन अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह और करुणा का अनुपम उदाहरण है, उनके द्वारा दी गई शिक्षा हमें स्वयं के भीतर शांति खोजने और दूसरों के प्रति दया भाव रखने की प्रेरणा देती है। भगवान महावीर ने जातिवाद और सामाजिक भेदभाव का विरोध किया और सभी जीवों के प्रति दया और करूणा का संदेश दिया। महावीर जयंती जैन धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार है, जो हमें भगवान महावीर के जीवन और शिक्षाओं से प्रेरणा लेने का अवसर प्रदान करता है।
कार्यक्रम में जिला सत्र न्यायाधीश चंद्रशेखर वशिष्ठ ने महावीर जयंती की शुभकामना देते हुए कहा कि न्याय पाने के लिए कचहरी में आने वाले दो पक्षों में आपसी सहमति बहुत कम ही बन पाती है। अपने ही सही होने और दूसरों के पूरी तरह गलत होने का हठ समस्या का मूल है। किसी दृष्टि से दूसरों की धारणा किसी अपेक्षा से तर्कसंगत भी हो सकती है। इसलिए दुराग्रह छोडक़र सच्चाई तथा अच्छाई को जहां से भी वह मिले ग्रहण करना चाहिए। सिर्फ शरीर से हिंसा न करना ही पर्याप्त नहीं, मन और वाणी से भी किसी को तकलीफ नहीं पहुंचानी चाहिए। महापुरुषों की शिक्षाओं को आचरण में उतारना सच्ची श्रद्धांजलि है।
भारत संत गौरव उप प्रवर्तक श्री पीयूष मुनि जी महाराज ने महावीर जयंती की शुभकामना देते हुए कहा कि जब सभ्यता-संस्कृति पर तामसिक शक्तियां कुठाराघात कर रही थीं, जातीय-सांप्रदायिक संकीर्णता ने विकराल पंख पसारे हुए थे, हिंसा के शैवाल के तले अहिंसा बिलख रही थी, धरती माता पुकार कर किसी अहिंसा प्रहरी का आह्वान कर रही थी, उस समय 2624 वर्ष पूर्व भगवान महावीर का अवतरण हुआ। महापुरुष के जीवन से निकलने वाली प्रकाश की किरणें भूले-भटकों का मार्गदर्शन करती हैं। महापुरुष धरती पर जन्म लेकर अपने तथा समाज के उत्थान के कार्य में स्वयं को लगाने के कारण महान बनते हैं। देवों, मनुष्यों तथा तिर्यंच संबंधी उपसर्गों से भी वे डांवाडोल नहीं हुए। समता योग से राग-द्वेष की गांठ खोलकर वह महान निर्ग्रन्थ बन गए। उन्होंने बहुत कम दिन अन्न-जल ग्रहण किया।
महासाध्वी श्री प्रमिला जी महाराज ने कहा कि भगवान महावीर की सीख में सभी समस्याओं का समाधान निहित है। पाखंड और आडंबर के विरुद्ध आवाज उठाने वाले अहिंसक क्रांतिकारी का संदेश युद्ध और आपसी वैमनस्य से त्रस्त मानवता के लिए राहतकारी है। परस्पर संवाद सभी समस्याओं का हल है। क्लेश से मानवता झुलस रही है। आपसी विवाद सामंजस्य को क्षतिग्रस्त करता है। किसी के अधिकारों का अतिक्रमण तथा खुद को दूसरों पर थोपना गड़बड़ की जड़ है। भगवान महावीर की शिक्षाओं में सारा समाधान तथा उलझनों को सुलझाने की शक्ति है।
इस मौके पर मुनि संयमेश, मुनि अभिनव, साध्वी जागृति, संजय जैन, जगदीश शर्मा, कर्मवीर सिंह, सुधा जैन, देशराज अग्रवाल, वीना अग्रवाल, वीना जैन, गौरव एजेंसी के सदस्यगण सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।







