चरण सिंह
सुशासन बाबू के नाम से प्रसिद्ध बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को बीजेपी ने बेबस कर दिया है। बिहार के चुनाव में बीजेपी के बड़े भाई की भूमिका निभाने वाले जदयू को एक सीट कम मिली है। मतलब बड़ा भाई अब छोटा भाई की भूमिका में आ चुका है। जदयू 100 तो बीजेपी 101 सीट पर चुनाव लड़ने जा रही है। नीतीश की अगुआई में चुनाव भले ही लड़ा जा रहो हो पर मुख्यमंत्री का नाम चुनाव परिणाम के बाद ही घोषित किया जाएगा। यह माना जा रहा है कि यदि एनडीए की सरकार बनती है तो नीतीश कुमार मुख्यमंत्री नहीं बनने जा रहे हैं। बीजेपी सम्राट चौधरी या फिर किसी दूसरे नेता को मुख्यमंत्री बना सकती है।
दरअसल नीतीश कुमार ने केवल जार्ज फर्नार्डिस बल्कि शरद यादव को भी अपमानित कर पार्टी से निकाला। एक समय था कि नीतीश कुमार जो चाहते थे वह पार्टी में होता था। अब अपमानित होने का नंबर नीतीश कुमार का खुद का है। वह भी बीजेपी करेगी। केंद्रीय मंत्री ललन सिंह और पार्टी के पूर्व अध्यक्ष संजय झा नीतीश कुमार से ज्यादा गृह मंत्री अमित शाह के संपर्क में हैं। यह बात नीतीश भी समझ रहे हैं। नीतीश कुमार का प्रयास है कि चुनाव में बीजेपी से ज्यादा सीटें ले आया जाए। फिर बीजेपी की मनमानी नहीं चल पाएगी पर यह बहुत मुश्किल लग रहा है। क्योंकि नीतीश कुमार की मतदाताओं से पकड़ ढीली होती जा रही है। जन सुराज के नेता नेता प्रशांत किशोर तो जदयू की 25 से ज्यादा सीटें नहीं मानकर चल रहे हैं। उनका कहना है कि यदि जदयू की 25 से ज्यादा सीटें आ गई तो वह राजनीति से सन्यास ले लेंगे। मतलब अब नीतीश को अपमानित करने का नंबर है।
पीएम मोदी भूले नहीं होंगे कि 2014 में उनके प्रधानमंत्री बनने का सबसे अधिक विरोध नीतीश कुमार ने ही किया था। उनके नाम पर ही नीतीश कुमार ने एनडीए से गठबंधन तोड़ा था। यदि एनडीए की सरकार बनी तो मुख्यमंत्री न बनने पर जब नीतीश कुमार फडफ़ड़ाएंगे। वहीं समय होगा कि जब नीतीश कुमार को बीजेपी अपमानित करेगी। ललन सिंह संजय जहां नीतीश के विभीषण बने हुए मिलेंगे। नीतीश इस परिवार वाद के दौर में अपने बेटे निशांत को लांच कराने की तैयार नहीं हैं। यदि कुछ समय पहले नीतीश कुमार अपने बेटे निशांत को जदयू में एडजस्ट कर देते तो आज उनकी जगह निशांत को एडजस्ट करने का दबाव पर एनडीए में हो जाता। वैसे भी जदयू में कई नेता निशांत को पार्टी में लेने की पैरवी कर रहे हैं।








