अशोक मित्तल, राजेंद्र गुप्ता, हरभजन सिंह की क्या थी राजनीतिक योग्यता ?
प्रो आनंद कुमार, योगेंद्र यादव, कुमार विश्वास, प्रशांत भूषण, मेधा पाटकर, शाजिया इल्मी और आशुतोष होते सांसद तो बदल जाती राजनीति!
चरण सिंह
आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने जो बोया है वही काट रहे हैं। राघव चड्ढा में ऐसी क्या योग्यता थी कि बड़े बड़े नेताओं को साइड लाइन उन्हें आगे बढ़ाया। राज्य सभा में उप नेता क्यों बनाया गया ? केजरीवाल ने राघव चड्ढा को पंजाब में ऐसे स्थापित किया कि उन्हें सुप्रीम सीएम कहा जाने लगा। केजरीवाल बताएं अशोक मित्तल ने राज्य सभा में कौन-कौन से मुद्दे उठाए ? राजेंद्र गुप्ता को राज्य सभा में क्यों भेजा गया था ? आज यदि आम आदमी पार्टी के सात सांसद बीजेपी में चले गए हैं तो यह घटना केजरीवाल को आईना दिखाने वाली है। जब केजरीवाल ने आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले साफ़ सुथरी छवि वाले नेताओं को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया। आंदोलन का संचालन करने वाले कुमार विश्वास को अपमानित कर पार्टी से निकाला दिया तो राघव चड्ढा और दूसरे छह सांसदों ने केजरीवाल के साथ कौन का अपराध कर दिया ? क्या केजरीवाल ने आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले योगेंद्र यादव, कुमार विश्वास, प्रशांत भूषण, शाजिया और आशुतोष की भावनाओं की कद्र की थी ? नहीं न। आंदोलन के साथियों को पीछे धकेल कर स्वार्थी लोगों को आगे बढ़ाने का खामियाजा ऐसे ही भुगतना पड़ता है।
दरअसल इन सातों सांसदों की जगह प्रो आनंद कुमार, प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव, कुमार विश्वास, मेधा पाटकर, शाजिया इल्मी और आशुतोष सांसद होते तो देश की दशा और दिशा ही और ही होती। केजरीवाल बताएं कि आम आदमी पार्टी क्यों बनाई गई थी ? देश की राजनीति सुधारने के लिए न। फिजूलखर्ची रोकने के लिए न। आम आदमी पार्टी को आगे बढ़ाने के लिए न। आम आदमी अपर्ति ने कितनी राजनीति सुधारी ? कितनी फिजूलखर्ची रोकी ? केजरीवाल तो मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण करने लिए मेट्रो से गए थे न। क्या अब किसी ने उन्हें मेट्रो में सफर करते देखा है ? जन लोकपाल बनाने के लिए ही आंदोलन हुआ था न ? क्या केजरीवाल ने जन लोकपाल बनाया ? केजरीवाल लोगों का बेवकूफ बनाकर राजनीति कर रहे हैं।
दिल्ली चुनाव हारने के बाद उन्होंने दिल्ली में रहकर संघर्ष नहीं किया, बल्कि पंजाब जाकर आराम फरमाने लगे। आप सांसद संजय सिंह कह रहे हैं कि सीबीआई और ईडी के डर से ये सांसद तोड़े गए हैं। ऐसे में प्रश्न उठता है कि ईडी और सीबीआई से न डरने वाले नेता तो आपने पार्टी से निकाल दिए। जेब का आदमी तो डरपोक और कायर होता है। यदि उसे गद्दारी करने के मौका मिलेगा तो वह करेगा। यही केजरीवाल कांग्रेस समेत सभी पार्टियों को भ्रष्ट बता रहे थे। बाद में सत्ता के लिए सभी से सट भी गए। जिस पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोला। उसी पार्टी के सहयोग से दिल्ली में सरकार बना ली। आज वे उन सभी दलों के नेताओं से केजरीवाल एंड टीम गलबहिया कर रही है जिन्हें वह भ्रष्ट बता रहे थे। जब केजरीवाल जनता को धोखा दे सकते हैं तो फिर उनके चेले भी तो वही करेंगे।
दरअसल आम आदमी पार्टी छोड़ने वाले राघव चड्ढा समेत सात सांसद अब बीजेपी के हो गए हैं। राज्य सभा अध्यक्ष सीपी राधा कृष्णनन ने इन सांसदों को बीजेपी में विलय की मंजूरी दे दी है। इन सांसदों की राज्य सभा सदस्यता खत्म करने के लिए आम आदमी पार्टी सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कर रही है पर कुछ नहीं होने वाला है। सब कुछ बड़ी रणनीति के तहत किया गया है। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने राज्यसभा अध्यक्ष सीपी राधाकृष्णन को चिट्ठी लिखी थी, जिसमें उन्होंने राघव चड्ढा और संदीप पाठक समेत AAP छोड़ने वाले सभी सांसदों को अयोग्य घोषित करने की मांग की थी. चिट्ठी में आगे कहा गया है कि आप के सातों सांसदों की ओर से उठाया गया ये कदम दल-बदल के समान है। यह पंजाब की जनता और भारत के संविधान के साथ विश्वासघात है। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर आम आदमी पार्टी इस मामले में कानूनी कदम उठाएगी। दरअसल राज्यसभा सचिवालय ने अब अधिसूचना जारी कर दी है, जिसमें आप के सभी बागी सांसदों को भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने की मंजूरी मिल गई है। अब उच्च सदन में आम आदमी पार्टी के सिर्फ तीन ही सांसद रह गए हैं। इनमें संजय सिंह, एनडी गुप्ता और बलबीर सिंह सीचेवाल शामिल हैं।

