विवाद की शुरुआत
6 जनवरी को दिल्ली विधानसभा में गुरु तेग बहादुर जी की 350वीं शहादत दिवस (नवंबर 2025 में आयोजित कार्यक्रम पर चर्चा) के दौरान हुई बहस के दौरान BJP नेताओं ने आरोप लगाया कि AAP की नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने सिख गुरुओं के खिलाफ अपमानजनक/अभद्र टिप्पणियां कीं।
दिल्ली सरकार के मंत्री और BJP नेता कपिल मिश्रा ने 7 जनवरी को सोशल मीडिया (X) पर एक छोटा वीडियो क्लिप शेयर किया, जिसमें कैप्शन/सबटाइटल्स के साथ दावा किया गया कि आतिशी ने “गुरु” शब्द का इस्तेमाल कर अपमान किया। उन्होंने इसे सदन की मर्यादा का उल्लंघन और गुरुओं की बेअदबी बताया।
AAP और आतिशी का पक्ष
AAP ने इसे फर्जी/एडिटेड वीडियो बताया और कहा कि मूल वीडियो में आतिशी ने “गुरु” शब्द नहीं बोला। उन्होंने BJP पर धार्मिक भावनाओं भड़काने और फेक वीडियो फैलाने का आरोप लगाया।
AAP ने कपिल मिश्रा से माफी मांगने की मांग की और कहा कि असली अपमान गुरुओं का BJP ने किया।
कानूनी और जांच के नतीजे
पंजाब की जालंधर पुलिस ने शिकायत पर कपिल मिश्रा (और कुछ अन्य) के खिलाफ FIR दर्ज की, क्योंकि फॉरेंसिक जांच (मोहाली लैब) में वीडियो डॉक्टर्ड/छेड़छाड़ किया हुआ पाया गया। पुलिस ने इसे जानबूझकर साजिश बताया।
15-16 जनवरी 2026 में जालंधर कोर्ट ने वीडियो को फर्जी करार दिया और सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से इसे हटाने का आदेश दिया, क्योंकि यह धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचा सकता है।
दिल्ली विधानसभा स्पीकर ने पंजाब पुलिस को नोटिस जारी किए और FIR पर स्पष्टीकरण मांगा।
कपिल मिश्रा का रुख
कपिल मिश्रा ने FIR को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया और कहा कि वे डरेंगे नहीं। उन्होंने आतिशी को “लापता” बताया (पोस्टर जारी किया: “आतिशी कहां हैं?”) और आरोप लगाया कि वे प्रिविलेज कमिटी के सामने नहीं आ रही हैं।
उन्होंने कहा कि मूल विधानसभा रिकॉर्ड में बातें गंभीर हैं और AAP/केजरीवाल इसे छिपा रहे हैं।
वर्तमान स्थिति (जनवरी 2026 तक)
कोर्ट के आदेश से वीडियो फर्जी साबित होने के बाद AAP ने BJP पर सिख विरोधी होने का आरोप लगाया और माफी की मांग की। BJP ने इसे राजनीतिक षड्यंत्र बताया और आतिशी पर सदन में स्पष्टीकरण की मांग बरकरार रखी। यह मामला दिल्ली-पंजाब (AAP vs BJP) के बीच राजनीतिक टकराव को दिखाता है, जहां धार्मिक संवेदनशीलता और फेक वीडियो का इस्तेमाल प्रमुख है।








