हालांकि, उनके इस्तीफे ने राजनीतिक हलकों में कई सवाल खड़े किए हैं। विपक्षी नेताओं, जैसे कांग्रेस के जयराम रमेश और मल्लिकार्जुन खड़गे, ने संकेत दिया है कि इस्तीफे के पीछे स्वास्थ्य कारणों से इतर “गहरे कारण” हो सकते हैं। कुछ का मानना है कि राजस्थान सभा के बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में केंद्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा और किरेन रिजिजू की अनुपस्थिति से धनखड़ नाराज थे। इसके अलावा, जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव को स्वीकार करने के उनके फैसले को भी इस्तीफे से जोड़ा जा रहा है।
विपक्षी नेताओं जैसे संजय राउत और शरद पवार ने धनखड़ से मुलाकात की कोशिश की, लेकिन वे असफल रहे। दूसरी ओर, कुछ अटकलें हैं कि यह इस्तीफा बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को उपराष्ट्रपति बनाने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है, हालांकि इस सिद्धांत को एनडीए नेताओं ने खारिज किया है।
धनखड़ के इस्तीफे के बाद, राजस्थान सभा की कार्यवाही अब डिप्टी चेयरमैन हरिवंश नारायण सिंह संभाल रहे हैं, और अगले छह महीनों में नए उपराष्ट्रपति का चुनाव होना है। धनखड़ के गृहनगर किठाना में उनके रिश्तेदार और ग्रामीण उनके स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।








