चरण सिंह
क्या देश में जाति और धर्म के नाम पर इतना पाखंड और नफरत का माहौल पैदा हो गया है कि न्यायपालिका भी इससे अछूती नहीं रह गई है। जो कानून के रखवाले हैं वे ही धर्म के नाम पर कानून तोड़ रहे हैं। किसी रैली या सभा में किसी नेता पर जूता फेंकने की घटना तो हो ही रही थी अब सीजेआई पर भी जूता फेंकने का प्रयास किया गया। धर्म के प्रति अंधभक्त ये वे लोग हैं जिन्हें रोजगार, महंगाई या फिर किसी जनहित के मुद्दे पर गुस्सा नहीं आता।
धर्म की घुट्टी लोगों को कैसे पिलाई जा रही है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जूता फेंकने का प्रयास करने वाला भी कानून का पाठ पढ़ाने वाला एक वकील है। बताया जा रहा है कि वकील राकेश किशोर यह कहते हुई चिल्लाया कि सनातन धर्म का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान, सनातन का अपमान नहीं चलेगा। हालांकि सीजेआई की टिप्पणी को भी न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता है। संवैधानिक और जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों की देश और समाज के प्रति बहुत बड़ी जिम्मेदारी होती है। उनकी बात से किसी की भावना आहत न हो, इसका इन लोगों को ध्यान रखना चाहिए।
दरअसल मामला मध्य प्रदेश के खजुराहो में भगवान विष्णु की 7 फुट ऊंची बिना सिर वाली मूर्ति के पुनर्स्थापन से जुड़ा हुआ है। सीजेआई गवई ने मामले को खारिज करते हुए यह टिप्पणी कर दी कि भगवान से खुद ही कहो कि इसे ठीक करें। आप विष्णु भक्त हैं, तो उनसे प्रार्थना करें। इससे वकील नाराज हो गया था।
ऐसे में प्रश्न उठता है कि आखिर धर्म से जुड़े मामलों पर सुनवाई करने की इतनी जल्दी क्या रहती है। सुप्रीम कोर्ट में ही विभिन्न समस्याओं से जुड़े न जाने कितने मामले विचाराधीन हैं पर उनके लिए कोर्ट के पास समय नहीं है। एक ओर वैज्ञानिक दृष्टि से देश के आगे बढ़ने की बात की जा रही है वहीं दूसरी ओर धर्म और जाति का समाज में इतना बोलबाला होता जा रहा है कि जमीनी मुद्दे पीछे छूटते जा रहे हैं।
इसमें दो राय नहीं है कि ये जो जाति और धर्म के नाम पर इतनी अंधभक्ति और नफरत देखी जा रही है यह राजनीतिक दलों की वोटबैंक की राजनीति का ही दुष्परिणाम है। बीजेपी को हर कदम हिन्दू वोट के लिए उठाना है तो कांग्रेस मुस्लिम और दलितों को रिझाने में लगी है। क्षेत्रीय दलों में सपा पीडीए, आरजेडी मुस्लिम यादव पर फोकस किये हुए है। ऐसे ही लगभग सभी दल जाति धर्म की राजनीति कर रहे हैं। जमीनी मुद्दों पर कोई बात करने को तैयार नहीं। नेता भी जाति के आधार पर हो गए हैं। कोई ओबीसी का नेता, कोई मुस्लिमों का नेता कोई हिन्दुओं का नेता कोई दलितों का नेता। देश और समाज का नेता बनने का कोई प्रयास भी नहीं करता। खुद प्रधानमंत्री अपने को ओबीसी नेता बताते हैं।
देखने की बात यह है कि बंगलों में रहने वाले अपने को शूद्र बता रहे हैं। दिन भर में अपने पर जनता के करोड़ों रुपए खर्च करने वाले अपने को गरीब, फ़क़ीर न जाने क्या-क्या बता रहे हैं। अमीर नेता गरीब के नाम से सहानुभूति बटोरने की कोशिश कर आ रहे हैं। बंगलों में रहने वाले गरीबों के हितों की बात करते हैं। उनके लिए लड़ने का दम्भ भरते हैं। आज स्थिति यह हो गई है कि जाति धर्म के नाम पर आलोचना कर वोटबेंक बनाया जा रहा है। बीजेपी मुग़ल शासकों को मुद्दा बनाती है तो कांग्रेस और दूसरे विपक्ष के दल हिन्दू राजा महाराजाओं का मुद्दा उठाकर अपना वोटबैंक तैयार कर रहे है।
पुलिस की पूछताछ में राकेश किशोर ने बताया कि वो CJI गवई की टिप्पणी से काफी नाराज था, जिसके कारण उसने ऐसा कदम उठाया। राकेश के अनुसार, CJI गवई की टिप्पणी सुनने के बाद से उसकी नींद उड़ गई थी। रोज रात को भगवान मुझसे पूछते थे कि इतने अपमान के बाद मैं आराम कैसे कर सकता हूं?







