क्या यही है हरियाणा साहित्य अकादमी की साहित्य सेवा ?

पंजाबी के एक साथ पांच सालों के पुरस्कार घोषित, हिंदी के अभी भी नहीं।

चयनित में कुछ एक तो अब दुनिया में नहीं, पांच सालों तक इंतजार क्या दिखाता है?

ऋषि प्रकाश कौशिक

हाल ही में हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा पंजाबी भाषा के गत पांच वर्षों के पुरस्कारों की घोषणा एक साथ की गई है। इस घोषणा से आप सहज ही अंदाजा लगा सकते हैं कि हरियाणा साहित्य अकादमी कितना कब और कैसे, किस स्तर पर साहित्यकारों के लिए कार्य कर रही है। पांच सालों के पुरस्कारों की एक साथ घोषणा यह दर्शाता है कि इस दौरान पुरस्कार पाने वाले अधिकांश साहित्यकारों का पुरस्कारों के प्रति आकर्षण या जज्बा समाप्त हो चुका है। इनमें से हो सकता है कुछ एक साहित्यकार आज ही धरती पर न हो। आखिर जो गतिविधियां वार्षिक तौर पर संपन्न होनी चाहिए वह 5 सालों की बाट क्यों जो रही है। यह हरियाणा साहित्य अकादमी के वर्तमान अध्यक्ष माननीय मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी और उपाध्यक्ष महोदय डॉ कुलदीप अग्निहोत्री के साथ-साथ अब हरियाणा साहित्य और संस्कृति के अलग-अलग भाषाओं के लिए बनाए गए निदेशक महोदयों को सोचने की सख्त जरूरत है। पंजाबी भाषा के गत 5 वर्षों के परिणाम तो खैर इतनी देर से सामने आ गए हैं लेकिन हमारी मातृभाषा हिंदी के वार्षिक परिणाम कहूं तो 2022 के पुरस्कारों की घोषणा आज 2024 तक नहीं हुई है। हमारी मातृभाषा के प्रति ऐसा सम्मान आखिर क्या दर्शाता है।

पिछले दशकों में हुए साहित्य, संस्कृति और भाषा के पतन का असर आगामी पीढ़ियों तक जाएगा। लेकिन किसे फिक्र है। राज्य अकादमी पुरस्कारों की वार्षिक गतिविधियां संदिग्ध है। जो कार्य एक वर्ष में पूर्ण होने चाहिए उनको करने में सालों लग रहें है। पुरस्कारों के लिए मूल्यांकन प्रक्रिया स्पष्ट और समयानुसार नहीं है। उदाहरण के लिए हरियाणा साहित्य अकादमी के वार्षिक परिणामों की घोषणा का साल खत्म होने को है, मगर अभी तक नहीं हुई है। न ही आगामी साल का प्रपत्र जारी किया गया है। एक अकादमी के भीतर क्या- क्या खेल चलते है ? पारदर्शिता के अभाव में किसी को पता नहीं चलता।

हरियाणा हिंदी साहित्य अकादमी के वार्षिक पुरस्कारों की घोषणा जिसका राज्य के साहित्यकार बेसब्री से इंतज़ार करते है, के वर्ष 2022 के परिणाम अभी 2024 में भी जारी नहीं हुए है। इससे आप अंदाज़ा लगा सकते है कि समाज को आईना दिखाने वाले किस क़द्र सोये पड़े है। हरियाणा हिंदी साहित्य अकादमी हर वर्ष 12 से अधिक साहित्यिक पुरस्कार जिसमें एक लाख से सात लाख तक की पुरस्कार राशि दी जाती है और श्रेष्ठ कृति के अंतर्गत पद्रह सौलह विधाओं में 31 -31 हज़ार रुपये की राशि सम्मान स्वरुप प्रदान करती है। इन पुरस्कारों के अलावा वर्ष भर की श्रेष्ठ पांडुलिपियों को चयनित कर उन्हें प्रकाशन अनुदान प्रदान करती है। लेकिन हरियाणा में सरकारी भर्तियों की तरह ये भी बड़ा दुखद है कि जो परिणाम अगस्त में घोषित होने थे; वो अगले साल कि जनवरी बीत जाने के बाद भी नहीं घोषित किये गए न ही साल 2023 का प्रपत्र समय पर जारी किया गया जिसमें आने वाले साल के लिए साहित्यकारों को आवेदन करना होता है; आखिर क्यों ?

उम्मीद है कि राज्य सरकारें अकादमियों के वर्तमान विवादास्पद कार्यों की जांच कराएगी और अकादमी में योग्य और प्रतिभाशाली लेखक, कलाकारों को नियुक्त करेगी। ताकि देश भर पर भाषा, साहित्य और संस्कृति नित नए आयाम गढ़ती रहे।

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