रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर (RCB) की दलील के अनुसार, बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में हुई भगदड़ की घटना में कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया द्वारा RCB, KSCA, और DNA नेटवर्क्स के प्रतिनिधियों की गिरफ्तारी के आदेश को अवैध माना गया है। RCB के वकील ने तर्क दिया कि गिरफ्तारी का निर्णय केवल जांच अधिकारी (Investigating Officer) के पास होता है, न कि मुख्यमंत्री के पास। उनका कहना था कि मुख्यमंत्री ने देर रात कैबिनेट बैठक के बाद निलंबन और गिरफ्तारी के आदेश दिए, जो कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन है।
कानूनी रूप से, भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 41 और 41A के तहत, पुलिस अधिकारी बिना वारंट के गिरफ्तारी कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए उचित कारण और प्रक्रिया का पालन आवश्यक है। मजिस्ट्रेट भी अपनी स्थानीय अधिकारिता में गिरफ्तारी का आदेश दे सकते हैं, परंतु मुख्यमंत्री को ऐसा कोई अधिकार नहीं है। RCB ने यह भी दलील दी कि भगदड़ के लिए KSCA या इसके पदाधिकारियों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, क्योंकि वे इस आयोजन से पूरी तरह अलग थे।
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने RCB और KSCA को राहत देते हुए प्रशासन को कोई कठोर कार्रवाई न करने और जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने अगली सुनवाई तक KSCA प्रबंधन के खिलाफ कठोर कदम न उठाने का आदेश दिया, बशर्ते वे जांच में सहयोग करें।

