क्या चीन की चाल में फंस गया भारत, तोड़ने जा रहा जापान के साथ 13 साल पुराना करार ? 

नई दिल्ली। चीन ने भारत को रेयर अर्थ मैग्नेट्स की सप्लाई रोक दी है। इससे भारत में ऑटो समेत कई सेक्टरों के लिए खतरा पैदा हो गया है। इस बीच भारत ने भी चीन पर निर्भरता कम करने के लिए कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने सरकारी कंपनी इंडियन रेयर अर्थ्स लिमिटेड को जापान को रेयर अर्थ एलिमेंट्स का निर्यात सस्पेंड करने को कहा है। सूत्रों के मुताबिक यह कंपनी 13 साल पुराने एक समझौते के तहत जापान को रेयर अर्थ एलिमेंट्स का एक्सपोर्ट कर रही थी।

IREL अब भारत में ही रेयर अर्थ एलिमेंट्स को प्रोसेस करने की क्षमता बढ़ाना चाहता है। अभी इस मामले में चीन सबसे आगे है। चीन का रेयर अर्थ प्रोडक्शन 2014 से तीन गुना हो चुका है। साल 2024 में उसने 270,000 मीट्रिक टन रेयर अर्थ का उत्पादन किया जो ग्लोबल प्रोडक्शन का 69% है। दुनिया की कुल रिफाइनिंग कैपेसिटी का 90% चीन के पास है। चीन ने रेयर अर्थ एलिमेंट्स के निर्यात को हथियार की तरह इस्तेमाल किया है। अप्रैल से चीन ने इनका निर्यात कम कर दिया है। इससे ऑटोमोबाइल और हाई-टेक सामान बनाने वाली कंपनियों पर दबाव बढ़ गया है।

 

कब हुआ था समझौता ? 

 

रिपोर्ट के मुताबिक हाल ही में वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने ऑटो और दूसरी इंडस्ट्री के अधिकारियों के साथ एक मीटिंग की। एक सूत्र ने बताया कि गोयल ने IREL से रेयर अर्थ एलिमेंट्स का निर्यात रोकने को कहा है। इनमें नियोडिमियम नाम का तत्व भी शामिल है। यह इलेक्ट्रिक वाहनों के मोटर में लगने वाले चुंबक बनाने के लिए बहुत जरूरी होता है। वाणिज्य मंत्रालय, IREL और परमाणु ऊर्जा विभाग से इस बारे में जानकारी मांगी गई थी, लेकिन उन्होंने तुरंत कोई जवाब नहीं दिया। परमाणु ऊर्जा विभाग ही IREL को देखता है।

साल 2012 में सरकार ने एक समझौता किया था। इसके तहत IREL जापान की कंपनी टोयोटा त्सुशो की एक यूनिट टोयोट्सु रेयर अर्थ्स इंडिया को रेयर अर्थ एलिमेंट सप्लाई करती है। टोयोट्सु रेयर अर्थ्स इंडिया इन एलिमेंट्स को प्रोसेस करके जापान भेजती है। जापान में इनका इस्तेमाल चुंबक बनाने में होता है। कस्टम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में टोयोट्सु ने जापान को 1,000 टन से ज्यादा रेयर अर्थ एलिमेंट्स भेजे थे। IREL ने कुल 2,900 टन रेयर अर्थ एलिमेंट्स का खनन किया था। यानी टोयोट्सु ने IREL के उत्पादन का एक तिहाई हिस्सा जापान को भेजा था। हालांकि, जापान अपनी जरूरत के लिए ज्यादातर रेयर अर्थ एलिमेंट्स चीन से ही लेता है।

 

दोस्ताना रिश्ते

 

टोयोटा त्सुशो और टोयोट्सु ने भी इस बारे में पूछे गए सवालों का तुरंत जवाब नहीं दिया। एक सूत्र ने बताया कि IREL रेयर अर्थ एलिमेंट्स का निर्यात इसलिए कर रही थी क्योंकि भारत में उन्हें प्रोसेस करने की क्षमता नहीं थी। लेकिन चीन से सप्लाई में दिक्कत आने के बाद IREL अब इन तत्वों को भारत में ही रखना चाहती है। साथ ही, वह भारत में खनन और प्रोसेसिंग को बढ़ाना चाहती है। IREL को चार खदानों के लिए सरकारी मंजूरी का इंतजार है।

हालांकि, भारत तुरंत जापान को सप्लाई नहीं रोक पाएगा क्योंकि यह एक द्विपक्षीय सरकारी समझौता है। सूत्र ने यह भी कहा कि IREL चाहती है कि इस मामले को आपसी सहमति से सुलझाया जाए क्योंकि जापान एक दोस्ताना देश है। जापान के व्यापार मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि हम द्विपक्षीय मामलों पर कोई जवाब नहीं देना चाहेंगे, सिर्फ इस मामले पर ही नहीं।

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