अंतरराष्ट्रीय सम्बन्धों पर भारत की स्तिथि या विदेशी व्यापार और अर्थव्यवस्था में भारतीय स्थान जैसे विषयों पर चर्चा के लिए सूचनाएं या जानकारी कहा से प्राप्त की जाए….. यहां इसपर कुछ लिखने से पूर्व मैं लॉर्ड थोमस बैबिंगटन मैकाले का 1835 में दिए गए बयान की एक बात जरूर रखना चाहूँगा, जो उन्होंने भारतीय उच्च शिक्षा प्रणाली (गुरुकुल स्कूल्स) को जड़ से खत्म करने के उद्देश्य से निर्धारित की गई थी कि भारतीय मुल के लोगों में अंग्रेजियत इस प्रकार से भरी जाए कि वे खुद अपनी इस उच्च श्रेणी की शिक्षा प्रणाली की जगह English education system को ही सही मानने लगे और ऐसा करने में सफल भी हुए। अब आप खुद ही फैसला करे कि 2 centuries बीतने पर भी हममें से अधिकांश लोग विदेशियों को ही अपनों से उत्तम मानते हैं।
News_ख़बरें!!!
हमारे पास ख़बर या कोई जानकारी मिलने के 2 भरोसेमंद माध्यम है, पहला अख़बार newspaper और दूसरा टेलीविजन या TV पर न्यूज। यहां वर्तमान में एक उदहारण देने से बात साफ हो सकेगी, जैसेकि president पुतिन का भारतीय दौरा जिसमें रक्षा मित्रता i.e.
▪︎दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे के बेस, एयरपोर्ट और पोर्ट का इस्तेमाल कर सकेंगी।
▪︎Sukhoi Su-57 का भारतीय एयर फोर्स में जुड़ना और अत्याधुनिक डिफेंस सिस्टम्स का भी भारतीय सेना में शामिल किया जाना।
उपर्युक्त जानकारियों को हम इन दो माध्यमों से ही भरोसेमंद स्थानों से प्राप्त कर सकते है।
अब हम इस प्रकार की ख़बरों को प्राप्त करने के तीसरे माध्यम की बात करते हैं, जो है “Internet”, परन्तु यहां सबसे बड़ी समस्या है कि आप या आपका मन जिस तरह की जानकारियों को देखने की इच्छा रखता है, वैसी ही सूचनाएं आपके पास पहुचना शुरू हो जाएंगी (जी हाँ केवल इच्छा भी समझ जाता है आधुनिक इन्टरनेट व्यव्स्था वेबसाइट्स) और इस प्रकार आपके विचार और साथ के साथ व्यक्तित्व भी एक तरफा हो जाता है….. यह काफी गंभीर और महत्वपूर्ण विषय है कि हमारा किस स्थान से जानकारियां लेना अधिक भरोसेमंद और उचित भी है।
अभय कुमार राजपूत








