PoK में बगावत: वर्तमान स्थिति और भारत की प्रतिक्रिया

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में पिछले कुछ दिनों से जारी विरोध प्रदर्शन अब हिंसक रूप ले चुके हैं। 29 सितंबर 2025 को आह्वानित हड़ताल के बाद ये प्रदर्शन भड़के, जो मुख्य रूप से आर्थिक शिकायतों—जैसे महंगे बिजली बिल, गेहूं की ऊंची कीमतें, इंटरनेट ब्लैकआउट और पाकिस्तानी सेना की मनमानी—के खिलाफ हैं। प्रदर्शनकारियों ने 38 मांगें रखीं, जिनमें सस्ती बिजली, आटा सब्सिडी और पाकिस्तानी संसद में PoK के लिए आरक्षित 12 सीटों को खत्म करना शामिल है। मुजफ्फराबाद को केंद्र बनाकर ये विरोध पूरे PoK में फैल गए, जहां पुलिस और सेना के साथ झड़पों में कम से कम 10-12 लोगों की मौत हो चुकी है, जिसमें 3 पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। सैकड़ों घायल हुए हैं, और इंटरनेट-पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं कट गई हैं।

वायरल वीडियो में प्रदर्शनकारी पाकिस्तानी सेना की वर्दियां, हेलमेट और ढालें मात्र 10-10 रुपये में बेचते नजर आ रहे हैं, जो सेना के खिलाफ गुस्से का प्रतीक है। नारे जैसे “इंकलाब आएगा” गूंज रहे हैं, और प्रदर्शन अब इस्लामाबाद व कराची तक फैल चुके हैं। पाकिस्तानी सरकार ने शहबाज शरीफ के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल भेजा, जिसने 21 मांगें मान लीं। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने समझौता किया, लेकिन अगले तीन दिनों तक शोक जुलूस निकालने का ऐलान किया है। मानवाधिकार संगठन HRCP ने इस्लामाबाद प्रेस क्लब पर पुलिस छापे की निंदा की है, जहां पत्रकारों पर लाठीचार्ज हुआ।

भारत की भूमिका: मूकदर्शक या सक्रिय हस्तक्षेप?

भारत ने इस बगावत पर तीखी प्रतिक्रिया दी है, लेकिन सैन्य हस्तक्षेप की कोई योजना नहीं दिख रही। विदेश मंत्रालय (MEA) ने 3 अक्टूबर 2025 को प्रेस ब्रीफिंग में पाकिस्तान को “दमनकारी नीति” अपनाने का दोषी ठहराया। प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि PoK में “भयानक मानवाधिकार उल्लंघन” हो रहे हैं, और पाकिस्तान को संसाधनों की लूट व अल्पसंख्यकों पर अत्याचार के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। भारत ने इसे पाकिस्तान और बांग्लादेश में हाशिए पर धकेले गए समुदायों पर हमले से जोड़ा।

क्या भारत सिर्फ मूकदर्शक बने रहेगा? वर्तमान में हां, क्योंकि भारत की रणनीति कूटनीतिक दबाव और अंतरराष्ट्रीय मंचों (जैसे UN) पर PoK को भारत का अभिन्न अंग बताने पर केंद्रित है। सैन्य कार्रवाई जोखिम भरी हो सकती है, खासकर जब PoK के लोग आर्थिक आजादी की मांग कर रहे हैं, न कि भारत से सीधे जुड़ाव की। हालांकि, भारत ने PoK के लोगों को नैतिक समर्थन दिया है—जैसे, 2023 के प्रदर्शनों में भी MEA ने पाकिस्तान की “उत्पीड़नकारी” कार्रवाई की आलोचना की थी। अगर हिंसा बढ़ी, तो भारत सीमा पर सतर्कता बढ़ा सकता है, लेकिन फिलहाल फोकस पाकिस्तान को अलग-थलग करने पर है।

PoK के लोग पाकिस्तानी सेना के खिलाफ खड़े होकर अपना भविष्य बदलने की कोशिश कर रहे हैं। भारत के लिए ये अवसर है कि वह वैश्विक मंच पर PoK की सच्चाई उजागर करे, ताकि वहां की आवाज मजबूत हो।

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