ईरान में इन दिनों शेर-सूरज (Lion and Sun) वाला पुराना झंडा काफी चर्चा में है, और “अल्लाहु अकबर” लिखा हुआ वर्तमान इस्लामी गणराज्य का झंडा विरोध का प्रतीक बन गया है। लेकिन ध्यान दें — ईरान का आधिकारिक राष्ट्रीय झंडा अभी भी वही है जिसमें हरे, सफेद और लाल रंग की पट्टियों के बीच इस्लामी प्रतीक है और किनारों पर “अल्लाहु अकबर” 22 बार लिखा हुआ है। फिर भी, दिसंबर 2025 से शुरू हुए बड़े विरोध प्रदर्शनों (जो आर्थिक संकट, महंगाई और शासन के खिलाफ हैं) में प्रदर्शनकारी इस पुराने झंडे को लहरा रहे हैं। यह झंडा 1979 की इस्लामी क्रांति से पहले ईरान का आधिकारिक झंडा था।
यहाँ दोनों झंडों की तस्वीरें हैं ताकि अंतर साफ समझ आए:
(वर्तमान झंडा: बीच में लाल इस्लामी प्रतीक और “अल्लाहु अकबर” लिखा हुआ)
(पुराना शेर-सूरज वाला झंडा: बीच में तलवार लिए शेर और सूरज)
क्यों हो रहा है यह “गेम”?
पुराना झंडा (शेर-सूरज): यह ईरान की हजारों साल पुरानी संस्कृति, फारसी पहचान, शक्ति (शेर) और प्रकाश/दिव्यता (सूरज) का प्रतीक है। 1979 क्रांति के बाद इसे हटा दिया गया क्योंकि यह राजशाही और “पश्चिमी प्रभाव” से जुड़ा माना गया।
नया झंडा: 1980 में अपनाया गया। इसमें “अल्लाहु अकबर” 22 बार इसलिए लिखा है क्योंकि क्रांति ईरानी कैलेंडर के 22 बहमन को सफल हुई थी। यह धार्मिक शासन का प्रतीक है।
प्रदर्शनकारियों के लिए: शेर-सूरज वाला झंडा उठाना मतलब मौजूदा कट्टर धार्मिक शासन को नकारना और सेक्युलर/पुरानी फारसी पहचान की वापसी की मांग करना। कई लोग इसे राजा रजा पहलवी (शाह के बेटे) की वापसी से भी जोड़ते हैं।
सबसे बड़ा “गेम” वाला ट्विस्ट
9 जनवरी 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व Twitter) ने ईरान के फ्लैग इमोजी को बदलकर शेर-सूरज वाला झंडा कर दिया। यह बदलाव विरोध प्रदर्शनों के समर्थन में किया गया (एलन मस्क की टीम ने यूजर रिक्वेस्ट पर अपडेट किया)।
नतीजा? ईरान के सरकारी अकाउंट्स और राज्य मीडिया पर भी अब यही पुराना झंडा दिखने लगा! यह एक बड़ा प्रतीकात्मक झटका है।
इसके अलावा, लंदन में ईरानी दूतावास पर भी प्रदर्शनकारियों ने वर्तमान झंडा उतारकर शेर-सूरज वाला फहरा दिया।
संक्षेप में: एक झंडा बदलने से पूरा राजनीतिक मैसेज बदल जाता है — यह सिर्फ कपड़ा नहीं, बल्कि ईरान की पहचान और भविष्य की लड़ाई का प्रतीक बन गया है। विरोध अभी जारी है, और यह झंडा उसकी सबसे ताकतवर आवाज बन चुका है।







