मरने के बाद भी इंस्टाग्राम अकाउंट “जिंदा” रह सकता है, लेकिन यह पूरी तरह से परिवार या दोस्तों के फैसले पर निर्भर करता है। इंस्टाग्राम की पॉलिसी के अनुसार, यूजर की मौत के बाद अकाउंट को तुरंत डिलीट नहीं किया जाता। इसके बजाय, इसे “मेमोरियलाइज्ड” (स्मृति में समर्पित) किया जा सकता है या पूरी तरह हटा दिया जा सकता है। ज्यादातर लोग इस बारे में नहीं जानते, लेकिन यहां हैं वो 5 राज (या तथ्य) जो इंस्टाग्राम की आधिकारिक नीतियों पर आधारित हैं।
अकाउंट तुरंत डिलीट नहीं होता: अगर किसी यूजर की मौत हो जाती है, तो इंस्टाग्राम उसका अकाउंट अपने आप डिलीट नहीं करता। परिवार या दोस्त कंपनी को सूचित कर सकते हैं और अकाउंट को मेमोरियलाइज्ड अकाउंट बना सकते हैं। इससे प्रोफाइल तस्वीर, पोस्ट और स्टोरीज जस की तस रहती हैं, लेकिन कोई नई पोस्ट या लॉगिन नहीं हो सकता। यह व्यक्ति को याद रखने का तरीका बन जाता है।
प्रूफ की जरूरत पड़ती है: मृत्यु की पुष्टि के लिए इंस्टाग्राम परिवार या करीबी से डेथ सर्टिफिकेट, मृत्यु प्रमाण पत्र या अखबार में छपी ओबिचुअरी (मृत्यु की खबर) जैसी आधिकारिक दस्तावेज मांगता है। इससे फर्जी रिपोर्ट्स को रोका जाता है।
पूरी तरह डिलीट करने का ऑप्शन: अगर परिवार चाहे तो “Request to Remove Account” फॉर्म भरकर अकाउंट को हमेशा के लिए हटा सकते हैं। इसके लिए यूजर की पहचान, रिश्ता साबित करने वाले दस्तावेज और कानूनी प्रूफ जमा करने पड़ते हैं। सुरक्षा के लिए कोई एक्सेस नहीं: मेमोरियलाइज्ड अकाउंट पर किसी को लॉगिन करने या पासवर्ड बदलने की इजाजत नहीं मिलती। यह सुनिश्चित करता है कि कोई मृत व्यक्ति के नाम से फेक पोस्ट या मैसेज न भेज सके। अकाउंट सर्च रिजल्ट्स में भी कम दिखाई देता है। डिजिटल स्मारक की तरह काम करता है: यह अकाउंट एक वर्चुअल मेमोरियल बन जाता है, जहां दोस्त और परिवार पुरानी तस्वीरें, पोस्ट और यादें देख सकते हैं। इंसान चला जाए।
प्रूफ की जरूरत पड़ती है: मृत्यु की पुष्टि के लिए इंस्टाग्राम परिवार या करीबी से डेथ सर्टिफिकेट, मृत्यु प्रमाण पत्र या अखबार में छपी ओबिचुअरी (मृत्यु की खबर) जैसी आधिकारिक दस्तावेज मांगता है। इससे फर्जी रिपोर्ट्स को रोका जाता है।
पूरी तरह डिलीट करने का ऑप्शन: अगर परिवार चाहे तो “Request to Remove Account” फॉर्म भरकर अकाउंट को हमेशा के लिए हटा सकते हैं। इसके लिए यूजर की पहचान, रिश्ता साबित करने वाले दस्तावेज और कानूनी प्रूफ जमा करने पड़ते हैं। सुरक्षा के लिए कोई एक्सेस नहीं: मेमोरियलाइज्ड अकाउंट पर किसी को लॉगिन करने या पासवर्ड बदलने की इजाजत नहीं मिलती। यह सुनिश्चित करता है कि कोई मृत व्यक्ति के नाम से फेक पोस्ट या मैसेज न भेज सके। अकाउंट सर्च रिजल्ट्स में भी कम दिखाई देता है। डिजिटल स्मारक की तरह काम करता है: यह अकाउंट एक वर्चुअल मेमोरियल बन जाता है, जहां दोस्त और परिवार पुरानी तस्वीरें, पोस्ट और यादें देख सकते हैं। इंसान चला जाए।








