भारत में आपातकाल 25 जून को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व में लागू किया गया था और यह 21 मार्च 1977 तक चला। इसे लागू करने के प्रमुख कारण निम्नलिखित थे:
राजनीतिक संकट: 1971 में इंदिरा गांधी की सरकार को भारी जीत मिली थी, लेकिन 1974-75 तक उनकी लोकप्रियता कम होने लगी। विपक्षी दलों, खासकर जयप्रकाश नारायण (जेपी) के नेतृत्व में, सरकार के खिलाफ व्यापक आंदोलन शुरू हो गए थे। जेपी ने “संपूर्ण क्रांति” का नारा दिया, जिससे सरकार पर दबाव बढ़ा।
इलाहाबाद हाई कोर्ट का फैसला: 12 जून 1975 को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इंदिरा गांधी के 1971 के रायबरेली लोकसभा चुनाव को अवैध घोषित कर दिया, क्योंकि उन पर चुनाव में अनुचित साधनों का उपयोग करने का आरोप सिद्ध हुआ था। कोर्ट ने उन्हें छह साल तक चुनाव लड़ने से रोक दिया। यह फैसला उनकी सत्ता के लिए बड़ा झटका था।
आर्थिक और सामाजिक अस्थिरता: उस समय देश में आर्थिक संकट, महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार की समस्याएं चरम पर थीं। हड़तालें और प्रदर्शन आम हो गए थे, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ रही थी।
आंतरिक सुरक्षा का हवाला: सरकार ने आपातकाल की घोषणा करते हुए “आंतरिक अशांति” को कारण बताया। इंदिरा गांधी ने कहा कि देश की एकता और स्थिरता खतरे में थी। राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत आपातकाल की घोषणा की।
आपातकाल के प्रभाव:
नागरिक स्वतंत्रता निलंबित कर दी गईं।
प्रेस सेंसरशिप लागू हुई।
विपक्षी नेताओं को जेल में डाल दिया गया।
कई विवादास्पद नीतियां लागू की गईं, जैसे नसबंदी अभियान।
यह भारतीय लोकतंत्र का एक विवादास्पद अध्याय रहा, जिसे कई लोग सत्ता के दुरुपयोग के रूप में देखते हैं। क्या आप इसके किसी विशेष पहलू के बारे में और जानना चाहेंगे?






